ऋषी तिवारी
Iran War: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत पर साफ दिखने लगा है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद एलपीजी (रसोई गैस) के संकट ने आम लोगों के साथ-साथ व्यापारिक क्षेत्र के लिए भी गंभीर मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हालात यह हैं कि रेस्टोरेंट से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक एलपीजी की किल्लत के कारण बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने वैकल्पिक उपाय अपनाने का फैसला किया है।
ऊर्जा आपूर्ति में बाधा, सरकार ने की कोशिशों का दावा
ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच सरकार का कहना है कि वह हालात को सामान्य करने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे एलपीजी की उपलब्धता पर भारी दबाव बढ़ गया है।
भारत ने निकाली नई तरकीब, अब अमेरिका से होगा आयात
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इस स्थिति पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर भारत पर पहले से ही दिखने लगा है।
उन्होंने कहा कि भारत का लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते होता था। इस मार्ग में बाधा आने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने अपनी रणनीति बदल दी है और अब वह अमेरिका से एलपीजी का आयात कर रहा है। इसके अलावा, एलएनजी की आपूर्ति के लिए ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों पर निर्भरता बढ़ाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से काम कर रही है ताकि आपूर्ति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
यह भी पढ़ें : Chaitra Navratri 2026: नवरात्र में इन शक्तिशाली मंत्रों से पाएं धन, विद्या और मोक्ष
एलपीजी की चिंताजनक स्थिति, लग रही लंबी कतारें
सुजाता शर्मा ने यह भी स्वीकार किया कि सरकारी प्रयासों के बावजूद एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग के सिस्टम में सुधार हुआ है और लगभग 93 प्रतिशत उपभोक्ता डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। कई इलाकों में लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे धैर्य रखें और डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने के बजाय होम डिलीवरी का इंतजार करें।
वैश्विक स्थिति क्यों है गंभीर?
गौरतलब है कि वैश्विक स्थिति अब काफी गंभीर हो चुकी है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त कार्रवाई के बाद संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब हमलों का केंद्र ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर आ गया है, जहां तेल और गैस उत्पादन से जुड़े संयंत्रों को निशाना बनाया जा रहा है। यह पहली बार है जब दोनों पक्षों की ओर से इस तरह सीधे तौर पर ऊर्जा क्षेत्र की अहम परिसंपत्तियों पर हमले किए गए हैं, जिसका असर दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति पर पड़ रहा है।

























