भारतीय शेयर बाजार आज नकारात्मक शुरुआत की संभावना के साथ खुलने के संकेत दे रहा है। वैश्विक संकेतकों में मिली-जुली दिशा दिख रही है, जिसके कारण निवेशकों की मनोदशा प्रभावित हो सकती है। एशियाई बाजारों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई, खासकर जब से अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के लारक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चर पर हमला किया।
इस घटना ने निवेशकों के बीच अस्थिरता का माहौल बना दिया है, जिससे भारतीय बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 331 अंक की बढ़त के साथ 77,264 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 85 अंक ऊपर उठकर 24,175 पर पहुंच गया था। लेकिन आज के दिन इन सूचकांकों के लिए वैश्विक संकेतों का प्रभाव महत्वपूर्ण रहेगा।
वैश्विक बाजारों का हाल
सोमवार को एशियाई बाजारों में गिरावट का सिलसिला देखा गया। दक्षिण कोरियाई कोस्पी सूचकांक 3.5 प्रतिशत गिरकर 2,400 के स्तर पर आ गया, जबकि जापान का निक्केई 225 सूचकांक 2.16 प्रतिशत नीचे गिरा। टोक्यो का टॉपिक्स सूचकांक भी 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 सूचकांक भी 0.27 प्रतिशत नीचे आया।
इन गिरावट का कारण अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता है, जिसने विश्व के प्रमुख बाजारों को प्रभावित किया है। अमेरिका में भी वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स में गिरावट देखी गई। डॉउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स 85 पॉइंट या 0.16 प्रतिशत गिर गया, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.2 प्रतिशत नीचे आ गए हैं। नैस्डैक-100 फ्यूचर्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहा है, जो संकेत देता है कि आज के कारोबार में नकारात्मक रुख रह सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव का प्रभाव
रविवार को अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के लारक द्वीप पर स्थित रॉकेट लॉन्चर पर हमला किया। यह घटना जुलाई के अंत के बाद पहली बार हुई है जब अमेरिकी बलों ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान के खिलाफ कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के पीछे का मकसद क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता को नियंत्रित करना है। अमेरिकी सेना ने इस कदम के जवाब में जॉर्डन में दो अमेरिकी हवाई अड्डों पर ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई का दावा किया है।
ईरान ने भी इस बीच जॉर्डन में अमेरिकी हवाई अड्डों पर हमला किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया है। इस घटना ने तेल की कीमतों को भी प्रभावित किया है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.15 डॉलर या 2.44 प्रतिशत बढ़कर 90.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 85.15 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
कच्चा तेल और सोने की कीमतें
तेल की कीमतें अचानक से बढ़ने से निवेशक चिंतित हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव के चलते आपूर्ति की आशंका बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर के ऊपर पहुंच गई हैं, जो कि पिछले महीनों के मुकाबले उच्च स्तर पर है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) भी 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा लागत पर असर पड़ेगा। वहीं, सोने के दाम भी इस अस्थिरता के बीच स्थिर बने हुए हैं। पिछले सत्र में सोने की कीमतें 3 प्रतिशत से अधिक गिरने के बाद सोमवार को काफी हद तक स्थिर हैं। स्पॉट गोल्ड 4,455.29 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर है, जो अगस्त के मध्य में अपने सबसे निचले स्तर को छूने के बाद है। दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोने का वायदा भी 0.6 प्रतिशत गिरकर 4,504.90 डॉलर पर पहुंच गया है।
भारतीय बाजार का वर्तमान परिदृश्य
भारतीय शेयर बाजार आज नकारात्मक संकेतों के साथ खुलने का अनुमान है। गिफ्ट निफ्टी 24,245 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले दिन के बंद के मुकाबले लगभग 96.4 पॉइंट नीचे है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार भी वैश्विक बाजारों के प्रभाव में आ सकता है। निवेशक सतर्क रहकर अपने फैसले लें और बाजार के अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतें। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन आज के दिन वैश्विक संकेतों का असर देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए सुझाव
मौजूदा माहौल में निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्कता बरतें और अपने पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करें। तेल और सोने जैसे वस्तु वर्ग में निवेश करने वाले निवेशकों को बाजार की दिशा पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, विदेशी बाजारों में हो रही गिरावट को ध्यान में रखते हुए, लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन सतर्कता और सही रणनीति से आप अपने निवेश को सुरक्षित कर सकते हैं।


























