नए महीने का आगाज होते ही आम उपभोक्ता की जेब पर महंगाई का वार तेज हो गया है। 1 सितंबर से रसोई का राशन, दूध-डेयरी उत्पाद, सब्जियां और ईंधन—सबके दाम एक साथ ऊपर चले गए हैं। रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों की बढ़ती कीमतें हर घर के महीने के बजट पर सीधा असर डालेंगी। आइए जानते हैं कौन-कौन सी चीजें कितनी महंगी हुईं और आपके शहर में अब नए भाव क्या चल रहे हैं।
लगातार दूसरे महीने जेट फ्यूल महंगा
घरेलू एयरलाइंस के लिए इस्तेमाल होने वाला एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ लगातार दूसरे महीने महंगा हुआ है। इस बार कीमतों में 5.46 प्रतिशत यानी 6.28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में एटीएफ की दर 115 रुपये से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। ईंधन खर्च बढ़ने का असर जल्द ही यात्रियों की जेब पर भी दिख सकता है, क्योंकि एयरलाइंस आमतौर पर इसे फ्यूल सरचार्ज या बढ़े हुए टिकट दामों के जरिए वसूलती हैं। त्योहारों के सीजन में यात्रा की मांग चरम पर होती है, ऐसे में महंगा एटीएफ हवाई सफर को आसान नहीं होने देगा।
मीठे पर मेहंगाई की पट्टी
उपभोक्ता मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में चीनी एक बार फिर 62 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। मुंबई के बाजार में एक किलो चीनी के 65 रुपये देने पड़ रहे हैं, वहीं चेन्नई में भाव 61 और कोलकाता में 66 रुपये चल रहा है। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति रांची की है, जहां चीनी 68 रुपये किलो तक पहुंच गई है। गौर करने वाली बात यह है कि बस एक दिन पहले तक इसके दाम 56 से 62 रुपये के बीच थे। एक ही दिन में दर्ज इतनी तेज छलांग ने गृहिणियों को परेशान कर दिया है।
गैस से जुड़ी खबरें भी अनहीप
1 सितंबर से 19 किलो का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो गया है। दिल्ली में इसकी कीमत 9.50 रुपये बढ़कर 2747.50 रुपये हो गई है। इसका सीधा असर होटल, ढाबे और कैटरिंग जैसे व्यवसायों पर पड़ेगा, जो अपना बढ़ा हुआ खर्च अंत में ग्राहकों से ही वसूलते हैं। इसी के साथ कुछ दिन पहले सीएनजी के दाम करीब 4 रुपये बढ़ चुके हैं और अब पाइप लाइन से आपूर्ति होने वाली पीएनजी भी महंगी हो गई है। यानी घर हो या सड़क, ईंधन का खर्च हर जगह बढ़ गया है।
दूध पर 9 रुपये का झटका
दूध भी आज से 9 रुपये महंगा हो गया है। चाय, दही, पनीर से लेकर मिठाई तक—दूध से बनने वाली लगभग हर चीज की कीमत पर इसका असर दिखना तय है। जिन परिवारों में बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूध की खपत ज्यादा है, उनके महीने का खर्च काफी बढ़ जाएगा।
सब्जी मंडी की मिली-जुली तस्वीर
सब्जियों के भाव में मिली-जुली तस्वीर दिख रही है। दिल्ली में आलू एक साल पहले के रेट से 6 रुपये सस्ता होकर 22 रुपये किलो बिक रहा है। मुंबई में आलू का भाव 28 रुपये, कोलकाता में 15, चेन्नई में 40 और रांची में 20 रुपये प्रति किलो है।
वहीं प्याज के दाम ने उपभोक्ताओं की टेंशन बढ़ा दी है। दिल्ली में प्याज 33 से 58 रुपये किलो तक पहुंच गया है। रांची में यह 38 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि चेन्नई और कोलकाता में 60 रुपये देने पड़ रहे हैं। मुंबई में एक किलो प्याज के 52 रुपये चुकाने होंगे।
राहत की खबर टमाटर से मिल रही है। दिल्ली में टमाटर 52 रुपये से घटकर 43 रुपये किलो हो गया है। मुंबई में भाव 60 से गिरकर 32 और चेन्नई में 45 से घटकर 30 रुपये पर आ गए हैं। हालांकि, कोलकाता में टमाटर 30 से बढ़कर 45 रुपये किलो हो गया है।
प्याज क्यों रुला रहा है? पुराना स्टॉक खत्म
भारत में प्याज की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मौसमी आवक पर टिका होता है। मार्च-अप्रैल में तैयार होने वाली रबी की फसल ही देश की सबसे बड़ी भंडारण वाली फसल मानी जाती है। यही स्टॉक कई महीनों तक बाजार की जरूरतें पूरी करता है और आमतौर पर अक्टूबर तक आपूर्ति का प्रमुख स्रोत बना रहता है। लेकिन इस साल पुराने स्टॉक पर दबाव अपेक्षाकृत ज्यादा है और नई फसल बाजार में आने में अभी वक्त है। आपूर्ति घटने और मांग बने रहने की स्थिति में आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
एक साल में 35-40% महंगे हुए अंडे
नेशनल एग को-ऑर्डिनेशन कमेटी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में अंडों के दाम में लगभग 35 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फिलहाल खेत से बिक्री पर एक अंडे की कीमत करीब 7 रुपये हो चुकी है, जबकि खुदरा बाजार में यह 8.50 से 9 रुपये में मिल रहा है। पोल्ट्री उद्योग के जानकारों का अनुमान है कि सर्दियों में अंडों की मांग और बढ़ने के साथ कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं।
तीज-त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है और ऐसे दौर में खाद्य पदार्थों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। ऐसे में सितंबर की शुरुआत में ही दर्ज हुई यह तेजी आने वाले हफ्तों में और गहराती दिख सकती है। राहत की उम्मीद नई फसल की बढ़ती आवक और सरकार की ओर से कीमतों को काबू में रखने के लिए उठाए जाने वाले कदमों से है। तब तक उपभोक्ताओं के लिए थोक भाव की तुलना करते हुए समझदारी से खरीदारी करना ही बेहतर विकल्प है।


























