संध्या समय न्यूज
Chaitra Navratri 2026: महाशक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि अपने चरम पर है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 मिनट पर शुरू हो रही है, जिसके साथ ही घटस्थापना के माध्यम से नवरात्रि की शुरुआत होगी। यह तिथि 20 मार्च की सुबह 4:52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार इस साल नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को समाप्त होगी। साथ ही, इसी दिन से नया हिंदू वर्ष भी प्रारंभ हो रहा है।
दुर्गा सप्तशती का महत्व
नवरात्रि में शक्ति साधना का सरल और प्रभावी उपाय दुर्गा सप्तशती का पाठ माना गया है। दुर्गा सप्तशती में देवी भगवती द्वारा दानवों के संहार का वर्णन है, जो महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित मार्कण्डेय पुराण का अंश है। इसमें 700 श्लोक और 13 अध्याय हैं। मान्यता है कि इसके पाठ से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
नवदुर्गाओं का स्वरूप और पूजा
ब्रह्मा जी द्वारा अपने पौत्र मार्कण्डेय ऋषि को दिए गए ‘देवीकवच’ में नवदुर्गाओं के स्वरूप का वर्णन है। इन नौ देवियों ने देव-दानव युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- प्रथम दिन:शैलपुत्री
- द्वितीय दिन:ब्रह्मचारिणी
- तृतीय दिन:चन्द्रघण्टा
- चतुर्थ दिन:कूष्माण्डा
- पंचम दिन:स्कन्दमाता
- षष्ठ दिन: कात्यायनी
- सप्तम दिन:कालरात्रि
- अष्टम दिन:महागौरी
- नवम दिन: सिद्धिदात्री
हर समस्या का समाधान: 18 शक्तिशाली मंत्र
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकता, तो वह माता के इन विशेष मंत्रों और श्लोकों का पाठ कर सकता है, जिससे सप्तशती पाठ के समान फल मिलता है:
1. मंगल प्राप्ति हेतु:
सर्व मंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
2. संकट निवारण हेतु:
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
3. भय मुक्ति हेतु:
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
4. रोग नाश एवं सौभाग्य प्राप्ति:
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
5. बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्र प्राप्ति:
*सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धन-धान्य-सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
6. शत्रु नाश एवं शक्ति प्राप्ति:
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥
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पाठ विधि
नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन घटस्थापना के बाद संकल्प लें। प्रातः स्नान के बाद दुर्गा माता की मूर्ति या चित्र का पूजन करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखकर रुद्राक्ष या तुलसी की माला से इन मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि नवरात्र भर इनका निरंतर जाप करने से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।





















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