Harish Rana : देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट से पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति मिलने वाले हरीश राणा का बुधवार को दिल्ली स्थित ग्रीन पार्क शमशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। 13 वर्षों से कोमा में पड़े हरीश के निधन पर परिवार सहित पूरा माहौल गमगीन था।
बहन-भाई ने दी मुखाग्नि
मंगलवार को एम्स दिल्ली में हरीश राणा का निधन हो गया था। सुबह उनका पार्थिव शरीर अस्पताल से ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया, जहां हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान हरीश के भाई और बहन ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर ब्रह्माकुमारी दीदी, परिवार के सदस्य और दोस्त मौजूद रहे। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
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माता-पिता के चेहरे पर था गहरा दुख
अंतिम यात्रा में माता-पिता का दर्द साफ दिख रहा था। पिता अशोक राणा के चेहरे पर मास्क होने के बावजूद उनकी नम आंखें बेटे को विदा करने का गम जाहिर कर रही थीं। मां की आंखें भी गम से भरी थीं। पूरे परिवार ने नम आंखों से हरीश को अंतिम विदाई दी।
हिमाचल का रहने वाला है परिवार
हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के प्लेटा गांव का रहने वाला है। पिता अशोक राणा 1989 में दिल्ली आए थे और मुंबई के एक प्रतिष्ठित होटल में शेफ का काम करते थे। 2013 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुए हादसे के बाद, जिसमें हरीश कोमा में चले गए थे, अशोक राणा ने नौकरी छोड़कर दिल्ली आकर परिवार की जिम्मेदारी संभाली थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और अंगदान का महान कदम
हरीश राणा भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति थे। 14 मार्च को उन्हें एम्स के पैलिएटिव केयर यूनिट में स्थानांतरित किया गया था। गम के बीच परिवार ने एक प्रेरणादायक फैसला लेते हुए हरीश के अंगों को दान करने का फैसला किया। परिवार ने उनकी दो कॉर्निया और हार्ट वाल्व दान कर दिए। इस फैसले की समाज में खूब सराहना हो रही है और इसे मानवता की मिसाल बताया जा रहा है। हरीश के इस योगदान से कई लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है।



















