गुरुग्राम के विभिन्न हिस्सों में जीएमडीए के अधिकारियों के साथ-साथ बुलडोजरों की गरज भी गूंजी। प्रशासन की ओर से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए गए इस विशाल अभियान के दौरान करीब 100 अस्थायी दुकानों और रेहड़ियों को धराशायी किया गया। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और दुकानदारों में काफी रोष देखने को मिला।
डीटीपी (डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) आरएस बाठ की अगुवाई में शुरू किए गए इस ऑपरेशन में जीएमडीए की टीमों ने कुल 16 किलोमीटर लंबी सड़कों को अतिक्रमणमुक्त कराया। यह अभियान सिर्फ किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ बुलडोजर चलाकर नगर निगम और जीएमडीए की ताकत का प्रदर्शन किया गया।
इन इलाकों में चला जीएमडीए का बुलडोजर
इस भव्य अभियान को कई जोन में बांटकर चलाया गया, ताकि अतिक्रमणकारियों को मौका न मिले। यहां प्रमुख इलाकों और वहां की कार्रवाई का विवरण देखें:
- सेक्टर-17 और 18: यहां करीब दो किलोमीटर लंबे रोड और उसके आसपास के सार्वजनिक स्थलों को पूरी तरह साफ किया गया। टीम ने 10 स्थायी शेड, कई अवैध खोखे (अस्थायी ढांचे) और अन्य अतिक्रमणकारी निर्माणों को जमींदोज किया।
- सनाथ रोड: इस मार्ग पर भी लगभग दो किलोमीटर के दायरे में कार्रवाई हुई। सड़क किनारे खड़ी अवैध रेहड़ियों और ठेलों को हटाया गया, जिससे वाहनों के लिए सड़क का असली और उपयोगी हिस्सा फिर से खुल गया।
- सेक्टर-30 से 41: इस विशाल आवासीय और व्यावसायिक बेल्ट में करीब पांच किलोमीटर सड़क मार्ग को निजी मालिकाना हक से मुक्त करवाया गया। यहां से 20 से ज्यादा अवैध खोखे, टिन शेड और अन्य तरह के अस्थायी ढांचों को तोड़ा गया।
- सेक्टर-60 से 67: इस इलाके में भी पांच किलोमीटर लंबी सड़कों को साफ किया गया। हालांकि, यहां कार्रवाई थोड़ी और सख्त रही, जिसमें सात स्थायी ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
- गुरुग्राम-सोहना रोड: इस व्यस्तम रूट पर भी लगभग दो किलोमीटर के हिस्से को इस विरोधर्मी अभियान में शामिल किया गया, जहां ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह अतिक्रमण को हटाया गया।
जीएमडीए सीईओ का स्पष्ट संदेश
इस पूरे ऑपरेशन के बाद जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पीसी मीणा ने स्पष्ट किया कि अब अतिक्रमण को लेकर किसी तरह की कोई तरजीह नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक भूमि, सड़कें और फुटपाथ आम नागरिकों के लिए होते हैं, न कि किसी की निजी दुकान के लिए।
पीसी मीणा ने आगे चेतावनी दी कि प्राधिकरण की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ (कोई छूट नहीं) की है। अगर कोई भी व्यक्ति या ग्रुप सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करके उनके नियोजित उपयोग में बाधा डालेगा, तो उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई भविष्य में भी लगातार जारी रहेगी।
तोड़फोड़ के खिलाफ खड़े हुए ग्रामीण
जहां एक ओर प्रशासन अतिक्रमण हटाने को विकास का रास्ता बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इस कार्रवाई का विरोध भी तेज होता जा रहा है। डीएलएफ (डेल्ही लैंड एंड फाइनेंस) एरिया में हो रही सीलिंग और तोड़फोड़ के विरोध में अब जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कमर कस ली है।
सोमवार दोपहर को ‘एकता एवं संघर्ष समिति’ के बैनर तले शमां टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। समिति के प्रधान चौधरी जितेंद्र यादव ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन अदालत के आदेश का बहाना बनाकर डीएलएफ में जमकर तोड़फोड़ कर रहा है। लेकिन उनका मानना है कि यह सिलसिला डीएलएफ तक सीमित नहीं रहने वाला। भय का माहौल है कि जल्द ही आसपास की अन्य सभी कॉलोनियों और गांवों में भी यह बुलडोजर पहुंच सकता है।
इसी डर और गुस्से को लेकर 26 अगस्त को जिला उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के बाहर एक विशाल ‘महापंचायत’ का आयोजन किया जा रहा है। चौधरी जितेंद्र यादव ने दावा किया कि इस महापंचायत में डीएलएफ और आसपास के करीब 25 गांवों के मौजिज (मालिकाना हक वाले) लोगों की भारी भीड़ उमड़ेगी। उनका कहना है कि अब सभी को अपने घरों और रोजगार को बचाने के लिए एकजुट होना होगा।
गुरुग्राम में लगातार जारी है बुलडोजर का दौर
यह कोई पहला मौका नहीं है जब गुरुग्राम में बुलडोजर चला है। वास्तव में, पिछले कई महीनों से शहरी क्षेत्रों में अवैध निर्माणों और कब्जों पर प्रशासन का ‘पीला पंजा’ (बुलडोजर) लगातार सक्रिय है। चाहे वह मुख्य सड़कें हों, फुटपाथ हों या फिर सेक्टरों में बने अनाधिकृत मकान, प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है।
हालांकि, इस चल रहे अभियान ने शहरी नियोजन और गरीबों या स्थानीय लोगों के रोजगार के अधिकार के बीच एक लंबी और कठिन लड़ाई की शुरुआत कर दी है। एक तरफ जहां सड़कों से जाम हटने और यातायात सुगम होने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों की छोटी दुकानें या रेहड़ियां टूटी हैं, उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। अब देखना यह होगा कि 26 अगस्त को होने वाली इस महापंचायत के बाद प्रशासन अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर कायम रहता है या फिर किसी बीच के रास्ते की तलाश होती है।


























