ओल्ड गुरुग्राम को मेट्रो सेवा से जोड़ने की बहुप्रतीक्षित परियोजना के रास्ते में एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्रोजेक्ट के तीन स्टेशनों पर यात्रियों के आने-जाने के लिए बनने वाले प्रवेश और निकासी गेट्स का निर्माण कार्य अटक गया है। वजह है कि इन स्थानों पर अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। प्रोजेक्ट को गति देने के लिए गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के सामने जमीन आवंटित करने का मामला उठाया है।
लगभग 4200 वर्ग मीटर जमीन की मांग
जानकारी के मुताबिक, तीन मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट पॉइंट बनाने के लिए जीएमआरएल को करीब 4200 वर्ग मीटर जमीन चाहिए। इस संबंध में कंपनी ने एचएसवीपी की संपदा अधिकारी को पत्र लिखकर आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। यहां यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि मेट्रो कार्य के लिए जिस सरकारी जमीन की जरूरत पड़ रही है, उसे प्रदेश सरकार जीएमआरएल को बिना किसी शुल्क के देने की तैयारी में है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह बाधा दूर हो जाएगी और निर्माण कार्य तेज गति से आगे बढ़ेगा।
पिछले साल अगस्त में आवंटित हुआ था टेंडर
यह परियोजना पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर सेक्टर-नौ तक विस्तारित होगी। इस रूट पर मेट्रो निर्माण का ठेका पिछले साल अगस्त महीने में आवंटित किया गया था। गौरतलब है कि 5 सितंबर को तत्कालीन केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्री मनोहर लाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से इस परियोजना का शुभारंभ किया था। तब से इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन जमीन संबंधी विवाद और विलंब के कारण कई जगह कार्य धीमा पड़ गया है।
सेक्टर-33 में बनेगा 50 एकड़ में मेट्रो डिपो
परियोजना के लिए सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर-33 में प्रस्तावित मेट्रो डिपो है, जिसके लिए लगभग 50 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इसमें से बड़ा हिस्सा एचएसवीपी पहले ही जीएमआरएल को सौंप चुका है। हालांकि, लगभग 10 हजार वर्ग मीटर भूमि अब भी प्राइवेट मालिकों से खरीदनी बाकी है। इस प्रक्रिया के लिए भूमि अधिग्रहण विभाग ने संबंधित किसानों और जमींदारों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
मुआवजे की जगह वैकल्पिक जमीन चाहते हैं मालिक
दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों की जमीन डिपो के लिए अधिग्रहित की जा रही है, वे नकद मुआवजा लेने के बजाय अन्य स्थान पर वैकल्पिक जमीन दिए जाने की मांग कर रहे हैं। यह मांग लेकर स्थानीय निवासियों ने भूमि अधिग्रहण विभाग के सामने अपनी बात रखी है। इस विषय पर हाल ही में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मेट्रो निर्माण कार्य की समीक्षा बैठक भी आयोजित की थी, जिसमें प्रोजेक्ट की प्रगति और बाधाओं पर गहन चर्चा हुई।
रेल विहार सोसाइटी के सामने बनेगा स्टेशन
परियोजना के तहत सेक्टर-47 स्थित रेल विहार सोसाइटी के सामने सुभाष चौक मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। इस स्टेशन के प्रवेश व निकासी द्वार गुरुग्राम-सोहना हाईवे पर स्थित आईएलडी मॉल के नजदीक बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस कार्य के लिए लगभग 824 वर्ग मीटर जमीन की मांग की गई है। यह स्टेशन इस इलाके में रहने वाले हजारों लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा, क्योंकि यहां से वे आसानी से मेट्रो नेटवर्क से जुड़ सकेंगे।
ओल्ड गुरुग्राम वालों को मिलेगी बड़ी राहत
लंबे समय से ओल्ड गुरुग्राम के निवासी मेट्रो सुविधा के इंतजार में हैं। सेक्टर-9 तक बढ़ने वाली यह मेट्रो लाइन क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या कम करने के साथ ही बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन पर दबाव भी घटाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से रियल एस्टेट सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी में सुधार आएगा।
गुरुग्राम से लेकर बावल तक दौड़ेगी रैपिड रेल
इसी तरह राज्य सरकार दक्षिणी हरियाणा के औद्योगिक शहरों को जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर (MRTS) का विकास कर रही है। इस कॉरिडोर से गुरुग्राम, मानेसर, धारूहेड़ा और बावल जैसे प्रमुख इंडस्ट्रियल टाउनशिप आपस में जुड़ेंगे। इस प्रोजेक्ट में कुछ हिस्से पर एलिवेटेड ट्रैक तो कुछ हिस्से पर जमीन पर रेलवे लाइन बिछाई जाएगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई की गति भी काफी तेज हो जाएगी।
अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2040 तक इस कॉरिडोर पर रोजाना लाखों लोग सफर करेंगे। इससे न सिर्फ नेशनल हाईवे पर वाहनों की संख्या घटेगी, बल्कि प्रदूषण की समस्या से भी राहत मिलेगी। इंडस्ट्री के लिहाज से भी यह कॉरिडोर गेम चेंजर साबित होगा, क्योंकि कच्चे माल और तैयार माल की ढुलाई तेजी से हो सकेगी।

























