जहाज से किचन तक: ईरान युद्ध के बीच LPG गैस आपके घर कैसे पहुंचती है? जानें पूरी प्रक्रिया

इन जहाजों से गैस आपकी रसोई तक कैसे पहुंचती है

संध्या समय न्यूज


LPG Gas : भारत से करीब 2800 किलोमीटर दूर ईरान में छिड़ी जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले लिया है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों और आपूर्ति (सप्लाई चेन) पर पड़ रहा है। ऐसे में ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे जहाजों का भारत पहुंचना राहत की खबर है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन जहाजों से गैस आपकी रसोई तक कैसे पहुंचती है?

संकट और राहत का अहम अपडेट

ईरान में जारी तनाव के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद होने की आशंका ने एशियाई देशों में खलबली मचा दी है। भारत में भी LPG गैस की बुकिंग और डिलीवरी में दिक्कतों की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसे में दो बड़े जहाजों—’शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’—के भारत पहुंचने से संकट कम होने की उम्मीद है। इन दोनों जहाजों पर कुल 92,700 टन गैस लदी थी, जो देश की एक से दो दिन की खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह गैस जहाज से निकलकर आपके किचन तक का सफर कैसे तय करती है? आइए, इस दिलचस्प प्रक्रिया को समझते हैं।

यह भी पढ़ें : ‘धुरंधर 2’ ने प्रीव्यू में ही बॉक्स ऑफिस पर मचा दी तूफान

जहाज से किचन तक: LPG गैस का सफर

यह प्रक्रिया काफी लंबी और तकनीकी है, जिसे मुख्य रूप से 5 चरणों में समझा जा सकता है:

  1.  उत्पादन और लोडिंग (Production & Loading)
    LPG कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस के रिफाइनिंग के दौरान एक उप-उत्पाद (By-product) के रूप में बनता है। यह प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होता है। इसे शिपिंग के लिए उच्च दबाव और बेहद कम तापमान पर तरल अवस्था में बदलकर विशेष बड़े जहाजों (Large Gas Carriers) में लोड किया जाता है।
  2. समुद्री सफर और टर्मिनल (Shipping & Terminals)
    समुद्री जहाज इस तरल गैस को भारत के तटीय टर्मिनल्स तक पहुंचाते हैं। भारत के प्रमुख टर्मिनल्स में शामिल हैं:
    * दाहेज (गुजरात)
    * मंगलुरु(कर्नाटक)
    * विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)
  3. जहाज से उतरने के बाद का ‘असली खेल’ (Storage)
    बंदरगाह पर पहुंचने के बाद, जहाज में रखी गैस को निकाला जाता है। यह गैस -42 डिग्री सेल्सियस के बेहद कम तापमान पर तरल अवस्था में रहती है। इसे जहाज से निकालकर विशाल ‘कोल्ड स्टोरेज टैंकों’ में सुरक्षित रखा जाता है।
  4.  बॉटलिंग प्लांट और सुरक्षा (Bottling & Safety)
    स्टोरेज टैंकों से गैस को पाइपलाइन के जरिए देशभर के बॉटलिंग प्लांट्स तक भेजा जाता है। यहां इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है:
    * जांच: खाली सिलेंडरों की अच्छी तरह जांच की जाती है।
    * भराई: हर सिलेंडर में सही मात्रा (जैसे 14.2 किलोग्राम) में गैस भरी जाती है।
    * गंध का मिश्रण: LPG गैस मूल रूप से गंधहीन होती है। लीकेज का पता लगाने के लिए इसमें ‘मर्कैप्टन’ (Mercaptan) नामक पदार्थ मिलाया जाता है, जो इसे एक खास तीखी गंध देता है।
  5. आपके घर तक पहुंच (Final Delivery)
    भरे हुए सिलेंडरों को ट्रकों में लादकर स्थानीय गोदामों (गैस एजेंसी) तक पहुंचाया जाता है। जब आप गैस की बुकिंग करते हैं, तो डिलीवरी मैन इन सिलेंडरों को आपके घर तक पहुंचाता है।

Sandhya Samay News

संध्या समय न्यूज़ – आपके विश्वास की आवाज़ संध्या समय न्यूज़ की स्थापना वर्ष 2018 में की गई, जो कि MSME में विधिवत रूप से पंजीकृत है। हमारा उद्देश्य समाज तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है। हम देश-प्रदेश की ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों, और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आपके सामने सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम अपने सभी दर्शकों और पाठकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें लगातार देखा, समझा और अपना विश्वास बनाए रखा। आपकी यही सराहना और समर्थन हमें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। संध्या समय न्यूज़ हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा के मूल्यों पर कार्य करता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now