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अमरावती में विकास तेज, लेकिन फायर ब्रिगेड व्यवस्था बेहद कमजोर

Amravati Fire Incidents: अमरावती शहर की पूरी आबादी की सुरक्षा का जिम्मा वर्तमान में मात्र 4 अग्निशमन केंद्रों—बडनेरा, प्रशांत नगर, ट्रांसपोर्ट नगर और मुख्य मुख्यालय पर है। शहर के विस्तार और बढ़ती आबादी को देखते हुए यह संख्या बेहद कम है। पिछले तीन सालों से 3 नए फायर स्टेशन बनाने के प्रस्ताव पेंडिंग पड़े हैं, लेकिन अब तक वे मूर्त रूप नहीं ले पाए हैं।

अमरावती में अग्निशमन विभाग के पास नहीं पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन

HIGHLIGHTS

  • चौथी मंजिल तक पहुंचने में असमर्थ अमरावती फायर ब्रिगेड
  • करोड़ों खर्च, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था बेहाल
  • अमरावती में आग का खतरा बढ़ा, प्रशासन की तैयारी अधूरी
  • हाईराइज इमारतों के सामने बेबस नजर आ रहा फायर विभाग
  • 3 करोड़ का रेस्क्यू वाहन बना शोपीस, जनता की सुरक्षा खतरे में

Amravati Fire Incidents: महाराष्ट्र के अमरावती शहर का चेहरा बदल रहा है। आधुनिकता की ओर अग्रसर इस शहर में दिन-प्रतिदिन नए मॉल, आलीशान मल्टीस्टोरी इमारतें, बड़े अस्पताल, होटल और व्यावसायिक परिसर उभर रहे हैं। शहर की आबादी लगभग 10 लाख के पार पहुंच चुकी है और शहर का विस्तार तेजी से हो रहा है। लेकिन, इस विकास की रफ्तार के अनुरूप शहर की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से अग्निशमन विभाग, कहीं पीछे छूट गया है।

मनपा (अमरावती महानगरपालिका) का अग्निशमन विभाग आज भी पुरानी सीमाओं और पुराने ढांचे में जकड़ा हुआ है। इस साल गर्मी के मौसम में ही शहर में छोटे-बड़े स्तर पर आग लगने की 200 से अधिक घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। ये आंकड़े किसी भी बड़े हादसे की चेतावनी हैं, जिसने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।

ऊंची इमारतों के सामने विभाग बेबस

शहर में ऊंची इमारतों का निर्माण तो बेरोक-टोक जारी है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि फायर ब्रिगेड के पास चौथी मंजिल तक पहुंचने वाली सीढ़ी भी उपलब्ध नहीं है। विभाग के पास वर्तमान में केवल 45 फीट ऊंची सीढ़ी है, जिससे सिर्फ दो या तीन मंजिल तक ही बचाव कार्य संभव है।

अगर किसी आवासीय या व्यावसायिक इमारत की चौथी या पांचवीं मंजिल पर आग लगती है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। ऐसी स्थिति में फायर ब्रिगेड के जवानों को पारंपरिक सीढ़ियों का सहारा लेकर ऊपर जाना पड़ता है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी होती है और जान-माल का नुकसान बढ़ता है। आधुनिक जमाने में जहां 10-15 मंजिला इमारतें आम हो गई हैं, वहां 45 फीट की सीढ़ी विभाग की कमजोरी को उजागर करती है। आखिरकार, बचाव कार्य पूरी तरह से उस इमारत के अपने फायर सेफ्टी सिस्टम पर निर्भर कर जाता है, जो कि एक बड़ा जोखिम है।

संसाधनों की कमी और लंबित प्रस्ताव

अमरावती शहर की पूरी आबादी की सुरक्षा का जिम्मा वर्तमान में मात्र 4 अग्निशमन केंद्रों—बडनेरा, प्रशांत नगर, ट्रांसपोर्ट नगर और मुख्य मुख्यालय पर है। शहर के विस्तार और बढ़ती आबादी को देखते हुए यह संख्या बेहद कम है। पिछले तीन सालों से 3 नए फायर स्टेशन बनाने के प्रस्ताव पेंडिंग पड़े हैं, लेकिन अब तक वे मूर्त रूप नहीं ले पाए हैं। इसका सीधा असर यह है कि मौजूदा तंत्र पर अत्यधिक दबाव है और आपातकालीन स्थिति में पहुंच में देरी आती है।

विभाग के पास कुल 28 वाहन मौजूद हैं, लेकिन मात्रा के बजाय गुणवत्ता और आधुनिकता की भारी कमी है। बढ़ती ऊंचाई वाली इमारतों के लिए हाई-राइज लैडर या स्काई लिफ्ट जैसे आधुनिक उपकरणों का अभाव है।

3 करोड़ का वाहन बना ‘सफेद हाथी’

सरकारी धन के दुरुपयोग का एक और मामला सामने आया है। मनपा ने करीब 3 करोड़ रुपये खर्च करके एक ‘मल्टी यूटिलिटी रेस्क्यू वाहन’ खरीदा था। मंशा थी कि यह वाहन आधुनिक तकनीक के साथ बचाव कार्यों में मदद करेगा, लेकिन हकीकत यह है कि उचित उपयोग न होने और प्रशिक्षण की कमी के कारण यह महंगा वाहन आज भी बेकार खड़ा है। यह केवल एक ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है, जिस पर लाखों रुपये सरकारी खजाने से बर्बाद हो चुके हैं, लेकिन जनता को कोई राहत नहीं मिली है।

मानव शक्ति का संकट

आधुनिक मशीनों की कमी के साथ-साथ विभाग में मानव संसाधनों की भारी कमी है। नियमों के मुताबिक, शहर के आकार को देखते हुए फायरमैन की संख्या काफी अधिक होनी चाहिए। लेकिन हालात यह हैं कि पूरे विभाग का काम-धाम मात्र 2 मुख्य फायरमैन के सहारे चलाया जा रहा है।

चारों अग्निशमन केंद्रों पर कुल 118 स्थायी और अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर कर्मचारी कार्यरत हैं। सुचारु रूप से कामकाज चलाने और आपात स्थितियों का सामना करने के लिए अभी भी विभाग को 80 और कर्मचारियों की तत्काल आवश्यकता है। कम्बल कम होने के कारण मौजूदा कर्मचारी लगातार दबाव में काम कर रहे हैं, जो उनकी दक्षता और सेहत पर भारी पड़ता है।

आर्थिक नुकसान और भविष्य की चुनौतियां

इस साल शहर में आग की कुल 330 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से अकेले गर्मी के मौसम में 220 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं से ना केवल जान-माल का खतरा बढ़ता है, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ है। छोटी-छोटी दुकानों से लेकर बड़ी इमारतों तक, आग की इन घटनाओं ने लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन का पक्ष

इन सभी कमियों के बीच, अमरावती के अग्निशमन अधीक्षक अजय पंधरे का कहना है कि विभाग अपने स्तर पर पूरी तरह से सजग है। उन्होंने बताया कि जब भी किसी इमारत को फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) दिया जाता है, तो इस बात की पूरी तरह से जांच-पड़ताल (वेरिफिकेशन) की जाती है कि उनके पास आग से निपटने के लिए सक्षम और अपनी सुदृढ़ अग्निशमन प्रणाली उपलब्ध है या नहीं।

हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल एनओसी की जांच ही काफी है? जब खुद फायर ब्रिगेड के पास ऊंची इमारतों तक पहुंचने के साधन नहीं हैं, तो फिर बिल्डर्स द्वारा बनाए गए फायर सिस्टम की भरोसेमंदी कितनी है? यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर प्रशासन को तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

अमरावती का अग्निशमन विभाग आज एक संकट के दौर से गुजर रहा है। शहर बढ़ रहा है, इमारतें ऊंची हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदारी संभालने वाला तंत्र पुराने ज़माने में अटका हुआ है। 200 से अधिक आग की घटनाएं एक चेतावनी हैं। अगर समय रहते नए फायर स्टेशनों का निर्माण नहीं किया गया, आधुनिक उपकरण और कर्मचारियों की कमी को नहीं पूरा किया गया, तो कल को कोई बड़ा हादसा शहर को झकझोर कर रख देगा। नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि है, और इसके लिए प्रशासन को अभी से कदम उठाने होंगे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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