दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसने लाखों मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया था। यह गिरोह कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अत्यधिक संवेदनशील और महंगी जीवनरक्षक दवाओं की तस्करी और अवैध डायवर्जन में लगा हुआ था। इस ऑपरेशन को अंजाम देते हुए पुलिस ने 7 अलग-अलग राज्यों से कुल 17 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
इस खुलासे ने पूरे देश में फार्मा सुरक्षा और दवा आपूर्ति श्रृंखला की कमज़ोरियों को उजागर किया है। आरोपियों के पास से जो हालात सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ब्रांड्स की करीब 9 करोड़ रुपये कीमत की एंटी-कैंसर दवाएं, 50 लाख रुपये नकद और भारी मात्रा में फर्जी पैकेजिंग सामग्री बरामद की है।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस टीमों द्वारा की गई ताबड़तोड़ छापेमारियों के दौरान अवैध रूप से जमा की गई 588 भरी हुई एंटी-कैंसर वायल (Vials), 6 खाली वायल, 7 खाली दवा के डिब्बे और अन्य महत्वपूर्ण दवाओं की 3,021 यूनिट्स को जब्त किया गया।
बरामद किए गए इंजेक्शनों और दवाओं में ‘Darzalex’, ‘Imfinzi’, ‘Erbitux’, ‘Opdyta’, ‘Gazyva’, ‘Bavencio’, ‘Adcetris’ और ‘Keytruda’ जैसी हाई-प्रोफाइल दवाएं शामिल हैं। ये सभी दवाएं लंग कैंसर, ब्लड कैंसर और अन्य गंभीर प्रकार के कैंसर के इलाज में डॉक्टरों द्वारा निर्धारित की जाती हैं। इनकी बाजार में कीमत लाखों में होती है।
सिंडिकेट का खतरनाक ‘मॉडस ऑपरेंडी’
जांच में यह बात सामने आई कि यह रैकेट किसी एक तरीके से काम नहीं करता था, बल्कि इसने दवाओं को इकट्ठा करने के तीन अलग-अलग और बेहद खतरनाक रास्ते अपनाए हुए थे। सबसे डरावनी बात यह है कि इन जीवनरक्षक दवाओं को बिना किसी वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस या तापमान नियंत्रण के घरों और अन्य असुरक्षित ठिकानों पर रखा जा रहा था। इसके बाद इन्हें बिचौलियों के जरिए देशभर में भेजा जाता था।
पैकेजिंग में की जाती थी रसायनों से हेरफेर
एंटी-कैंसर दवाएं बेहद संवेदनशील होती हैं और इनकी बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और MRP का पूरा रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। लेकिन पुलिस ने पाया कि आरोपी दवाओं की मूल पैकेजिंग के साथ छेड़छाड़ करते थे। वे पुराने कार्टन और खाली डिब्बों को सुरक्षित रखते थे और उस पर लगे बैच नंबर, एमआरपी तथा पहचान से जुड़ी जानकारियों को ‘एसीटोन’ (Acetone) जैसे तेज रसायनों की मदद से पूरी तरह से मिटा देते थे। इसके बाद दवाओं को थर्मोकोल बॉक्स, बबल रैप और पॉलीथिन में पैक कर नए सिरे से भेज दिया जाता था। पुलिस ने इन लेनदेन के रजिस्टर और डायरियां भी बरामद की हैं, जिनसे पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
22 जून से चल रही थी गुप्त जांच
यह सफलता एकदम से नहीं मिली। पुलिस को 22 जून को एक गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने इस मामले की बारीकी से निगरानी शुरू की। टेक्निकल सर्विलांस और गुप्तचरों की मदद से संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई, जो मुख्य रूप से दिल्ली के पूर्वी हिस्सों, रोहिणी और महाराष्ट्र के मुंबई में फैले थे।
साक्ष्य जुटने के बाद 11 जुलाई को दिल्ली और नवी मुंबई में ड्रग्स कंट्रोल विभाग तथा स्थानीय पुलिस के सहयोग से क्राइम ब्रांच की 7 अलग-अलग टीमों ने एक साथ छापेमारी की।
पूछताछ के बाद पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर के अलावा मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैले इस सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त किया। गिरफ्तार किए गए 17 लोग कोई आम अपराधी नहीं हैं, बल्कि इनमें बड़े दवा कारोबारी, मेडिकल स्टोर के मालिक, अस्पताल के कर्मचारी और फार्मास्युटिकल कंपनियों से जुड़े लोग शामिल हैं।


























