Delhi News: देश की राजनीति में एक बार फिर परिसीमन का मुद्दा गरमाता नजर आ रहा है। केंद्र सरकार आगामी संसद के मानसून सत्र में परिसीमन बिल लाने की योजना बना रही है। इस बार सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को लेकर बहुत ही सावधानीपूर्वक और रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना चाहती है। सरकार का उद्देश्य है कि बिल पारित होने से पहले सभी बड़े क्षेत्रीय दलों को साथ लाया जाए, ताकि विपक्षी विरोध को कम किया जा सके और प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके। इस दिशा में, सरकार ने अब से ही संवाद का सिलसिला शुरू कर दिया है और विभिन्न दलों से बातचीत कर रही है।
Delhi News: सहमति की दिशा में कदम
पिछले कुछ वर्षों में परिसीमन का मुद्दा राजनीतिक विवाद का विषय बना रहा है। 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा गरमाया था। विपक्ष का आरोप था कि परिसीमन के जरिए उत्तर भारत की सीटें बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक शक्ति कम हो जाएगी। इस स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार इस बार पहले ही विभिन्न दलों से संपर्क कर रही है। सरकार का मानना है कि सहमति से ही बिल को पारित कराना आसान होगा और विवाद से बचा जा सकेगा।
Delhi News:किन दलों से संपर्क हुआ है?
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने सबसे पहले दक्षिणी राज्यों के प्रमुख दलों से बातचीत शुरू की है। इनमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। TMC की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट रुख नहीं आया है, लेकिन कई सांसद सरकार की बात सुनने और बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हैं। TMC ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, हालांकि अभी तक पार्टी ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। दूसरी ओर, DMK ने भी इस प्रक्रिया में रुचि दिखाई है। पार्टी का कहना है कि जब नया प्रस्ताव आएगा, तभी वे अपनी राय स्पष्ट करेंगे।
Delhi News:परिसीमन क्या है और क्यों है जरूरी?
परिसीमन का अर्थ है, लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण। हर निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक खास इलाके को निर्धारित किया जाता है, जिसे ‘निर्वाचन क्षेत्र’ कहा जाता है। जैसे-जैसे देश में जनसंख्या का वितरण बदलता है, वैसे-वैसे इन इलाकों की सीमाओं और सीटों की संख्या में बदलाव की जरूरत होती है। यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी होती है ताकि प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर सही ढंग से हो सके। यदि जनसंख्या में असमानता बढ़ती है तो कुछ क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कम हो जाता है, जबकि दूसरों का अधिक।
Delhi News: जनसंख्या के आधार पर सीटों का वितरण
विवाद का मुख्य कारण दक्षिणी राज्यों का कम जनसंख्या वृद्धि दर है। इन राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में परिवार नियोजन और छोटे परिवार की नीति का सफलतापूर्वक पालन हुआ है, जिससे वहाँ जनसंख्या अपेक्षाकृत कम बढ़ी है। दूसरी ओर उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। यदि सीटें जनसंख्या के आधार पर पुनः निर्धारित की जाएं, तो उत्तर भारत की सीटें बढ़ेंगी और दक्षिण के राज्यों की संख्या घटेगी। दक्षिणी राज्यों का डर है कि उनके जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों का राजनीतिक फ़ायदा नहीं मिलेगा और उनकी संसद में ताकत कम हो जाएगी। यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गर्मागर्म बहस का विषय बना हुआ है।
Delhi News: सहमति का प्रयास
सरकार का मानना है कि बिना व्यापक समर्थन के कोई भी बिल पास नहीं हो सकता। इसलिए, वह चाहता है कि बिल के नए ड्राफ्ट को तैयार कर इसे संसद में पेश करने से पहले सभी दलों को दिखाया जाए। यदि सहमति बनती है, तो यह बिल बिना विवाद के पास हो सकता है। यदि विरोध जारी रहता है, तो फिर से राजनीतिक टकराव और विरोध के हालात बन सकते हैं। इसीलिए, मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार ने दलों के साथ संवाद का सिलसिला तेज कर दिया है।
भविष्य की दिशा: क्या होगा आगे?
अगले कदम के रूप में, सरकार सबसे पहले नया ड्राफ्ट तैयार करेगी। फिर, इसे सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा किया जाएगा। यदि दल इस पर सहमत हो जाते हैं, तो बिल संसद में पेश किया जाएगा। यदि सहमति नहीं बन पाई, तो विवाद और विरोध की स्थिति फिर से उभर सकती है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य है कि बिल को पारित कराने में आसानी हो और राजनीतिक स्थिरता बनी रहे। अभी भी इस बात का इंतजार है कि विभिन्न दल नए प्रस्ताव पर क्या राय देते हैं।
अब तक कितनी बार हुआ है परिसीमन?
इतिहास में अब तक कुल चार बार परिसीमन का कार्य हुआ है। पहली बार 1952 में, फिर 1962, उसके बाद 1973 और अंतिम बार 2002 में। तब से अब तक कुल 543 सीटें ही फ्रीज रह गई हैं, यानी इन पर फिर से पुनर्विचार नहीं हुआ है। इन वर्षों में, परिसीमन के नियम और प्रक्रिया में बदलाव भी हुए हैं, और यह कार्य राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक कारकों के आधार पर किया जाता रहा है।





















