संध्या समय न्यूज
Delhi News : पश्चिम दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) का स्वच्छता अभियान जमीनी हकीकत में किसी किरकिरी से कम नहीं दिख रहा है। बुद्ध बाजार समेत कई इलाकों में पिछले कई दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह बदहाल होने के आरोप लग रहे हैं। इलाके में गंदगी के अंबार लगे हैं और नालियों से उठ रही दुर्गंध से रहवासियों का जीना दूभर हो गया है।
सिर्फ ‘पैसे’ पर निर्भर सफाई
बता दें कि इलाके के रहवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि सफाई कर्मचारियों की देखभाल पूरी तरह ‘रिश्वत’ पर निर्भर करती है। लोगों का कहना है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां उन्हीं गलियों में आती हैं जहां से उन्हें पैसा मिलता है। आम दिनों में तो गाड़ियां नजर ही नहीं आती हैं, लेकिन त्योहार आने के पहले कुछ रिहायशियों से ‘हड़ताल’ करने के लिए ये गाड़ियां अचानक प्रकट हो जाती हैं। जहां पैसे नहीं मिलते, वहां कई महीनों तक सफाई कर्मचारी का दिखना मुश्किल हो जाता है।
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विधायक के दावे और जमीनी हकीकत
बता दें कि मौजूदा सियासी हालात पर नजर डालें तो भाजपा सरकार स्वच्छता के नाम पर जोर-शोर से दावे करते नजर आ रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। लोगों ने बताया कि स्थिति की जानकारी विधायक को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सड़कों और स्वच्छता के नाम पर हो रहे भाषण बयानबाजी तक सीमित दिख रहे हैं।
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डस्टबीन की कमी और दुर्गंध का संकट
मोहन गार्डन में एक और बड़ी समस्या डस्टबीन का न होना है। कस्बेवासियों के पास कचरा फेंकने का कोई विकल्प नहीं बचा है, जिसके चलते वे खुले में खाली पड़े प्लॉटों में कूड़ा फेंकने को मजबूर हैं। समय पर इस कूड़े को न उठाए जाने के कारण वह सड़कों पर फैल जाता है और उससे निकलने वाली तेज दुर्गंध से आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है।



















