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99.77 करोड़ की साइबर ठगी का पर्दाफाश, तीन आरोपी गिरफ्तार

Delhi Cyber ​​Police News:ठगी का तरीका बेहद ही सुनियोजित था। आरोपी पहले व्हाट्सऐप (WhatsApp) कॉल्स और मैसेज के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और शेयर बाजार में 'गारंटीशुदा मुनाफा' का लालच देते थे। इसके बाद पीड़ितों को 'Trademakeralgo' नाम का एक फर्जी ऐप डाउनलोड कराया जाता था।

शेयर मार्केट के नाम पर हाईटेक ठगी, इंजीनियर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

HIGHLIGHTS

  • 30 लाख की नौकरी छोड़ बना साइबर ठगी का मास्टरमाइंड
  • दिल्ली साइबर पुलिस का बड़ा खुलासा
  • MNC इंजीनियर निकला ठगी गैंग का सरगना
  • शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा देकर 636 लोगों से करोड़ों की ठगी
  • फर्जी ट्रेडिंग ऐप से देशभर में ठगी, बेंगलुरु का इंजीनियर गिरफ्तार

Delhi Cyber ​​Police News: दिल्ली साइबर पुलिस ने शेयर बाजार में निवेश का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने देशभर के 636 लोगों को अपना शिकार बनाकर लगभग 99.77 करोड़ रुपये की ठगी की। सबसे चौंकाने वाला खुलासा इस गिरोह के मास्टरमाइंड का है, जो पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर है और एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में 30 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी कर रहा था।

30 लाख की नौकरी करने वाला था मास्टरमाइंड

पुलिस के अनुसार, आरोपी रवि राठौर बेंगलुरु में रहता था और एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करता था। अपनी तकनीकी समझ और मांग की गई आय के बावजूद, उसने शेयर मार्केट के नाम पर लोगों को लूटने का रास्ता अपनाया। रवि और उसके साथियों ने मिलकर फर्जी मोबाइल ऐप और वेबसाइट बनाईं, जिनके जरिए निवेशकों को झांसा दिया गया।

ऐसे दिया जाता था वार

ठगी का तरीका बेहद ही सुनियोजित था। आरोपी पहले व्हाट्सऐप (WhatsApp) कॉल्स और मैसेज के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और शेयर बाजार में ‘गारंटीशुदा मुनाफा’ का लालच देते थे। इसके बाद पीड़ितों को ‘Trademakeralgo’ नाम का एक फर्जी ऐप डाउनलोड कराया जाता था। शुरुआत में लोगों को छोटी रकम जमा कराने को कहा जाता था और ऐप पर नकली मुनाफा दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता था। जैसे ही पीड़ित बड़ी रकम निवेश करता और मुनाफा निकालने की कोशिश करता, उसे टालमटोल की जाती या और पैसे जमा करने के लिए कहा जाता।

पुलिस ने ऐसे पकड़ा सुराग

मामले का खुलासा तब हुआ जब पहाड़गंज निवासी एक व्यक्ति को शक हुआ और उसने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया था कि उसने फोनपे (PhonePe) के जरिए 10 हजार रुपये जमा किए थे, लेकिन पैसे निकालने पर उससे और रकम मांगी जाने लगी।

शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू कर दी। IP ट्रैकिंग, सर्वर लॉग और बैंक लेन-देन की जांच से पुलिस को बड़ी सफलता मिली। पता चला कि इस रैकेट का तकनीकी संचालन बेंगलुरु से हो रहा था, जबकि कॉल सेंटर और बैंकिंग नेटवर्क मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सनावद में स्थित था।

दो राज्यों में एक साथ छापेमारी

साक्ष्य मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने दो विशेष टीमें गठित कीं। कर्नाटक और मध्य प्रदेश में एक साथ छापेमारी करके पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बेंगलुरु से मास्टरमाइंड रवि राठौर को और मध्य प्रदेश के सनावद से उसके दो साथी सुदामा व विकास राठौर को अरेस्ट किया गया।

भारी मात्रा में बरामद हुआ सामान

आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 4 सीपीयू (CPU), 3 लैपटॉप, 17 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज, हजारों पीड़ितों का डेटा और एक महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन कार बरामद की है। पूछताछ में यह भी पता चला है कि सनावद में गिरोह द्वारा चलाए जा रहे कॉल सेंटर में महिला कॉलर्स का इस्तेमाल किया जाता था, जो लोगों को अपने मीठे बोलों में फंसाकर ठगी का शिकार बनाती थीं।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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