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“संविधान या बंदूक…” ममता बनर्जी का केंद्र पर बड़ा हमला

Mamata Banerjee's Statement: ममता बनर्जी का यह बयान हाल ही में हावड़ा रेलवे स्टेशन इलाके में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद आया है, जहां प्रशासन ने कथित अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है।

बुलडोजर कार्रवाई पर भड़कीं ममता, बोलीं- संविधान सबसे ताकतवर

HIGHLIGHTS

  • बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतरी टीएमसी
  • ममता बनर्जी का बड़ा बयान- संविधान से ऊपर कोई नहीं
  • “गरीबों को उजाड़ा जा रहा” ममता बनर्जी ने प्रशासन पर उठाए सवाल
  • हावड़ा में बुलडोजर कार्रवाई से बंगाल की राजनीति में बवाल
  • “न्यायपालिका कानून की सच्ची रक्षक” ममता बनर्जी का बड़ा संदेश

Mamata Banerjee’s Statement: ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर “स्टेट टेररिज्म” यानी राज्य आतंकवाद का आरोप लगाया है। कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों को संबोधित करते हुए टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि वह संविधान की रक्षा के लिए अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी और किसी भी दमनकारी कार्रवाई से डरने वाली नहीं हैं।

ममता बनर्जी का यह बयान हाल ही में हावड़ा रेलवे स्टेशन इलाके में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद आया है, जहां प्रशासन ने कथित अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है और तृणमूल कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है।

“संविधान ही सबसे बड़ी ताकत”

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र में संविधान सर्वोच्च है और किसी भी प्रकार की ताकत संविधान से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मैं न्यायपालिका को याद दिलाना चाहती हूं कि वे कानून के सच्चे रक्षक हैं। मैं राज्य आतंकवाद के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखूंगी। मैं देखूंगी कि किसमें अधिक शक्ति है – संविधान में या बंदूक की नली में। उनके इस बयान को केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों पर सीधा हमला माना जा रहा है। ममता ने आरोप लगाया कि विरोध की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक ताकत और पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

“लोगों को उजाड़ा जा रहा”

टीएमसी सुप्रीमो ने अपने शासनकाल में किए गए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि जब कल्याणी एक्सप्रेस सेतु का निर्माण किया गया था, तब 43 परिवार प्रभावित हुए थे, लेकिन उनकी सरकार ने सभी के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि हमने कभी लोगों को सड़क पर नहीं छोड़ा। विकास के साथ पुनर्वास भी किया। लेकिन अब प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर गरीबों को उजाड़ा जा रहा है। ममता ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में विकास की राजनीति नहीं बल्कि “तोड़फोड़ और निशान मिटाने की राजनीति” की जा रही है।

केंद्र सरकार को दी चेतावनी

अपने भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि सत्ता हमेशा स्थायी नहीं रहती। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सत्ता से गिरने के बाद आपको अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ेगा। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं।

उनके इस बयान को आगामी चुनावों और केंद्र-राज्य टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से टीएमसी और केंद्र सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है।

हावड़ा में बुलडोजर कार्रवाई से बढ़ा विवाद

दरअसल, 16 मई को हावड़ा रेलवे स्टेशन के आसपास प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया था। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कई कथित अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया। प्रशासन का कहना था कि रेलवे और सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था, जिसे हटाना जरूरी था।

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों और टीएमसी नेताओं ने विरोध जताया। पार्टी का आरोप है कि बिना पर्याप्त नोटिस और पुनर्वास व्यवस्था के लोगों को बेदखल किया गया।

विधानसभा के बाहर टीएमसी का प्रदर्शन

बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने इसे “बुलडोजर संस्कृति” करार देते हुए कहा कि गरीब और कमजोर वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है।

टीएमसी ने कोलकाता और आसपास के इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

ममता बनर्जी के बयान के बाद राज्य की राजनीति और अधिक गर्म हो गई है। विपक्षी दलों ने उनके बयान को राजनीतिक ड्रामा बताया है, जबकि टीएमसी समर्थक इसे लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बुलडोजर कार्रवाई और पुनर्वास जैसे मुद्दे आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकते हैं। खासतौर पर ऐसे समय में जब केंद्र और राज्य सरकार के बीच पहले से कई मुद्दों को लेकर टकराव जारी है।

संविधान बनाम शक्ति की राजनीति?

ममता बनर्जी का “संविधान या बंदूक” वाला बयान अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक तरफ टीएमसी इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे कानून व्यवस्था के खिलाफ बयानबाजी करार दे रहा है।

हालांकि, इतना तय है कि हावड़ा बुलडोजर कार्रवाई के बाद शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार, प्रशासन और विपक्ष इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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