प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के आरोप, चुनाव आयोग निशाने पर

सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका और सौरव दास ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाए। जानिए हिरासत, सुरक्षा व्यवस्था और दिल्ली में पाबंदियों को लेकर उन्होंने क्या कहा।

सीजेपी प्रेस कॉन्फ्रेंस: चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर आरोप

HIGHLIGHTS

  • सीजेपी के चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
  • दिल्ली पुलिस पर सीजेपी का बड़ा हमला
  • दिल्ली में आपातकाल जैसे हालात: सीजेपी
  • चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्षपात का आरोप

दिल्ली के प्रेस क्लब में रविवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि सौरव दास ने हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार और दिल्ली में लागू पाबंदियों पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात को लोकतंत्र और आम नागरिकों के लिए चिंताजनक बताया। ये सभी आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं की ओर से लगाए गए हैं।

‘चुनाव आयोग समझौता कर चुका है’: आशुतोष रांका

आशुतोष रांका ने कहा कि बीते 72 घंटों में देश में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने दावा किया कि यह लड़ाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। रांका के मुताबिक, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी देश के लोकतांत्रिक हितों की रक्षा करना है, लेकिन वह अपनी भूमिका से समझौता कर चुका है।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए काम करने का आरोप भी लगाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस आरोप के समर्थन में कोई स्वतंत्र दस्तावेज या विस्तृत साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने की जानकारी नहीं दी गई। चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

 हिरासत में अमानवीय व्यवहार का आरोप

रांका ने अभिजीत दीपके की दादी के निधन का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार में हुई मृत्यु की खबर दिए जाने के दौरान दिल्ली पुलिस का व्यवहार संवेदनहीन था। उनके अनुसार, पुलिसकर्मी उस समय कैमरे और माइक्रोफोन लेकर मौजूद थे और घटना को रिकॉर्ड कर रहे थे।

रांका ने कहा कि दीपके ने पुलिस से अपने चचेरे भाई से बात करने की अनुमति मांगी थी, जो गांव में मौजूद था। उनका कहना था कि दीपके अपने माता-पिता की सेहत को लेकर चिंतित थे और परिवार में क्या हुआ, यह समझना चाहते थे। रांका ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी इस मांग पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने इस व्यवहार को अमानवीय बताते हुए कहा कि किसी करीबी की मृत्यु के समय व्यक्ति को परिवार से बात करने का अवसर मिलना चाहिए।

चार पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिया धन्यवाद

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रांका ने अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनाराई विजयन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने छात्रों और युवाओं के साथ सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र के मुद्दे पर आवाज उठाई। रांका ने उनके प्रयासों के लिए आभार जताया।

अलग-अलग थानों में रखने का दावा

सौरव दास ने कहा कि हिरासत के दौरान उन्हें आरकेपुरम थाने में रखा गया था, जबकि आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को दूसरी जगह ले जाया गया। उनके मुताबिक, तीनों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया था। दास ने यह आशंका भी जताई कि पुलिस ने उनके फोन अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच की हो सकती है और फोन में सबूत प्लांट किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

ये दावे सौरव दास के बयान पर आधारित हैं। पुलिस की ओर से हिरासत की जगह, फोन की जांच या सबूतों से जुड़े आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की रिपोर्टिंग में उपलब्ध नहीं है।

दिल्ली में पाबंदियों पर सवाल

दास ने दावा किया कि पिछले तीन-चार दिनों में दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और शहर के कई हिस्सों में आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। उन्होंने सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती और दूसरे राज्यों से जवानों को दिल्ली लाए जाने की बात कही। उनके अनुसार, 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, कुछ रेल सेवाएं प्रभावित हुईं और दुकानों को भी बंद कराया गया।

दास ने कहा कि ऐसी पाबंदियों का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहता। आम नागरिकों को भी काम, यात्रा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी हो सकती है।

उन्होंने मेट्रो स्टेशनों के बंद होने, दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रेनों पर असर और राजधानी एक्सप्रेस रद्द होने के दावों का हवाला देते हुए कहा कि इससे दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को कठिनाई हुई होगी। इन सेवाओं से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि और अधिकारियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

दास ने मौजूदा स्थिति को “खुली इमरजेंसी जैसी” बताते हुए इसकी तुलना 1975 के आपातकाल से की। यह उनकी राजनीतिक टिप्पणी थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए आरोपों पर संबंधित सरकारी विभागों, दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग का पक्ष सामने आना बाकी है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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