इंदौर में चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। भंवरकुआं चौराहे पर टंट्या भील की प्रतिमा के नीचे बैठे प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर सवाल खड़े होते हैं।
यह प्रदर्शन ऐसे समय शुरू हुआ है जब दिल्ली में भी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध जारी है। इंदौर के छात्र अपनी मांगों को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके कारणों की जानकारी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक की जानी चाहिए।

भंवरकुआं चौराहे पर जारी है धरना
प्रदर्शनकारी छात्र भंवरकुआं चौराहे पर धरने पर बैठे हैं। यह इलाका इंदौर में छात्र आंदोलनों का जाना-पहचाना केंद्र रहा है। छात्रों के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
धरने में शामिल छात्रों ने कहा कि वोट डालना नागरिकों का महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार है। अगर किसी मतदाता का नाम सूची से हटता है, तो उसे इसकी जानकारी और शिकायत दर्ज कराने का स्पष्ट रास्ता मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया के बारे में अधिक पारदर्शी जानकारी देने की मांग की है।
13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने का दावा
मीडिया से बातचीत में प्रदर्शनकारी छात्रों ने दावा किया कि देशभर में 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। यह आंकड़ा प्रदर्शनकारियों का दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि और संदर्भ की जानकारी अलग से देखी जानी चाहिए।

छात्रों का कहना है कि नाम हटाने की संख्या, प्रक्रिया और वजहों को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार, मतदाताओं को यह जानने का अवसर मिलना चाहिए कि उनका नाम सूची में है या नहीं और नाम हटने की स्थिति में उसे दोबारा जुड़वाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी।
प्रदर्शनकारियों ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता के साथ जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों का असर सीधे मतदान पर पड़ सकता है, इसलिए इस प्रक्रिया में स्पष्ट नियम और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था जरूरी है।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
धरने पर बैठे छात्रों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे भूख हड़ताल शुरू कर सकते हैं। फिलहाल प्रदर्शनकारी भंवरकुआं चौराहे पर शांतिपूर्ण धरने के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलन आगे किस रूप में बढ़ेगा, यह प्रशासन और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
भंवरकुआं पहले भी छात्र आंदोलन का केंद्र रहा
इंदौर का भंवरकुआं चौराहा पहले भी छात्र आंदोलनों के दौरान चर्चा में रहा है। नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर यहां छात्रों ने प्रदर्शन किया था, जिसकी गूंज शहर से बाहर तक पहुंची थी। अब चुनाव आयोग और मतदाता सूची के सवालों को लेकर छात्र इसी स्थान पर जुटे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मुद्दा किसी एक संगठन या वर्ग तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में नाम दर्ज होना और मतदान का अवसर मिलना व्यापक जनहित से जुड़ा विषय है। इसलिए वे चाहते हैं कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से दिया जाए।
दिल्ली के प्रदर्शन का इंदौर में असर
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच इंदौर में शुरू हुआ यह धरना भी ध्यान खींच रहा है। छात्रों ने अपने आंदोलन को मतदान के अधिकार, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जोड़ा है।
फिलहाल भंवरकुआं चौराहे पर छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। प्रदर्शनकारियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है और जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में प्रशासन या चुनाव आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या आंदोलन तेज होता है—इस पर सबकी नजर रहेगी।























