दिल्ली में प्रदर्शन के लिए पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके दो साथियों को हिरासत में लिए जाने के बाद रिहा कर दिया गया है। कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद तीनों को इस शर्त पर छोड़ा गया कि वे एक साल तक शांति बनाए रखेंगे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को निवारक कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाते हुए आज रविवार को दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी नेता अजिंक्य शिंदे ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों, नागरिक समाज के सदस्यों और राजनीतिक हस्तियों सहित 15,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया या पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। हालांकि, यह संख्या पार्टी का दावा है।
एयरपोर्ट से हिरासत, फिर मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास शनिवार को दिल्ली पहुंचे थे। वे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। दिल्ली पुलिस ने तीनों को एयरपोर्ट से हिरासत में लिया। बाद में उन्हें दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
पुलिस ने एक दिन बाद बताया कि तीनों को निवारक हिरासत में रखा गया था। मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई की शर्त के अनुसार, तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखनी होगी।
निवारक हिरासत किसी व्यक्ति को पहले से किए गए अपराध के लिए सजा देने की कार्रवाई नहीं होती। इसका उद्देश्य संभावित अपराध या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को रोकना होता है। पुलिस के अनुसार, दीपके और उनके साथियों के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

अजिंक्य शिंदे ने उठाए हिरासत पर सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नेता अजिंक्य शिंदे अब पार्टी के विरोध प्रदर्शन की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके और उनके सह-संयोजकों सौरव दास तथा आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने के बाद काफी समय तक उनके बारे में जानकारी नहीं दी गई।
अजिंक्य शिंदे के मुताबिक, हिरासत के 12 घंटे बाद भी तीनों की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन से जुड़े 15,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया या पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अजिंक्य शिंदे ने रविवार को जंतर-मंतर तक मार्च करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सीजेपी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
पत्रकारों की हिरासत पर मीडिया संगठनों की निंदा
प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने और उनके उपकरण जब्त किए जाने की खबरों पर पत्रकार संगठनों ने चिंता जताई है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई), इंडियन वुमेन्स प्रेस कॉर्प्स (आईडब्ल्यूपीसी), दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (डीयूजे) और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की दिल्ली इकाई ने संयुक्त बयान जारी किया।
बयान में संगठनों ने कहा कि कई पत्रकारों को उनके प्रेस पहचान पत्र दिखाने के बावजूद हिरासत में लिया गया। कुछ पत्रकारों के फोन और अन्य उपकरण भी जब्त किए जाने की बात कही गई। संगठनों ने पत्रकारों को अपना काम करने देने और मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करने की मांग की।
मुंबई में भी प्रदर्शन का ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने रविवार को मुंबई में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की घोषणा की। अजिंक्य शिंदे के अनुसार, प्रदर्शन शाम चार बजे शिवाजी पार्क के टी-जंक्शन पर आयोजित किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि इसके बाद अलग-अलग शहरों में भी विरोध कार्यक्रम किए जाएंगे।
शिंदे ने नेताओं की गिरफ्तारी को सरकार की बड़ी गलती बताते हुए कहा कि आंदोलन अब देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल रहा है। सीजेपी ने प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने की बात कही है। दिल्ली और मुंबई में घोषित कार्यक्रमों को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी सामने आने का इंतजार है।
























