ऋषी तिवारी
Noida News : आईएमएस लॉ कॉलेज की नयी पहल ‘ज्यूरिस एकेडमिया सोसाइटी’ ने धर्मों के पार नारीवादी आंदोलनों के सामाजिक और विधिक दृष्टिकोण पर एक प्रेजेंटेशन प्रतिस्पर्धा का सफल आयोजन किया। सेक्टर 62 स्थित संस्थान परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को धार्मिक परिप्रेक्ष्यों में नारीवादी आंदोलनों का गहन विश्लेषण करने और उनके सामाजिक एवं विधिक प्रभावों को समझने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रतिभागियों को शोध पद्धति, केस लॉ विश्लेषण एवं प्रभावी प्रस्तुति कौशल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई, ताकि वे अपने विचारों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।
दो श्रेणियों में हुआ आयोजन
ज्यूरिस एकेडमिया सोसाइटी की संयोजक प्रो. स्वाती त्यागी ने बताया कि बुधवार को आयोजित इस प्रतिस्पर्धा को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया। प्रथम श्रेणी में सामाजिक आंदोलनों पर प्रस्तुति देनी थी, जबकि द्वितीय श्रेणी में केस लॉ प्रस्तुति पर आधारित कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौरान 15 प्रतिभागियों ने सती प्रथा उन्मूलन, बाल विवाह, महिला शिक्षा, व्यक्तिगत विधि सुधार तथा महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों जैसे ज्वलंत विषयों पर अपने-अपने विचार रखे।

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विजेताओं का हुआ ऐलान
प्रतिस्पर्धा का मूल्यांकन प्रोफेसर (डॉ.) भाविश गुप्ता, व्यास कुमार यादव एवं डॉ. सचिन गोयल की त्रिसदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। परिणामों की घोषणा में निमिषा त्रिपाठी एवं अदीबा जंग ने प्रथम स्थान हासिल कर विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। वहीं, आकांक्षा बाजपेयी प्रथम उपविजेता रहीं, जबकि शाहीन खान ने द्वितीय उपविजेता का स्थान अपना बनाया।
बेहतर कानूनी विशेषज्ञ बनने में मददगार
आईएमएस लॉ कॉलेज की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजुम हसन ने इस अवसर पर कहा कि छात्रों में समालोचनात्मक सोच, विधिक जागरूकता एवं प्रभावी व्यक्तित्व कौशल के विकास के लिए इस प्रकार की प्रतियोगिताएं अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे अकादमिक आयोजनों से विद्यार्थियों में न केवल विषय की गहन समझ विकसित होती है, बल्कि उनमें विश्लेषणात्मक सोच, शोध क्षमता एवं प्रभावी अभिव्यक्ति कौशल का भी विकास होता है।”



















