PM Modi On Middle East crisis in Lok Sabha : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध का असर अब भारत पर भी साफ दिखने लगा है। संसद में इस मुद्दे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने कई बड़ी और अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने संसद को आश्वस्त किया कि सरकार आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय—तीनों स्तर पर इस संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है।
भारत के सामने बड़ी चुनौतियां
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह संकट तीन हफ्ते से ज्यादा समय से जारी है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि भारत के लिए भी यह स्थिति आसान नहीं है और कई मोर्चों पर चुनौतियां सामने आई हैं।
नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
पीएम मोदी ने बताया कि जिस क्षेत्र में युद्ध चल रहा है, वह वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। वहां करीब 1 करोड़ भारतीय निवास करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने संसद को जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसमें सिर्फ ईरान से ही करीब 1,000 भारतीयों को निकाला गया, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ लोगों की मौत और घायल होने की दुखद खबरें भी सामने आई हैं।
पेट्रोल-डीजल संकट पर सरकार का ‘मास्टर प्लान’
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी ने संसद में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि भारत में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है, जो इस समय संकट में है। ऐसे में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है।
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उन्होंने बताया कि आयात में विविधीकरण भारत अब पहले से ज्यादा देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है। पहले जहां 27 देशों से आयात होता था, अब यह बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गया है। बढ़ाया गया भंडार देश के पास 53 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा तेल का भंडार मौजूद है। घरेलू उपाय देश अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी आयात करता है, इसलिए घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले कुछ सालों में इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से मदद मिली है और अब पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जा रहा है। इसके अलावा रेलवे के बिजलीकरण से भी ऊर्जा पर दबाव कम हुआ है।
खेती और खाद का मुद्दा
प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध का असर खेती पर भी पड़ सकता है, लेकिन देश में फिलहाल पर्याप्त खाद्यान्न मौजूद है। किसानों के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और 6 नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, ताकि खेती पर असर कम से कम पड़े।
‘भारत हर स्थिति के लिए तैयार’
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार लगातार वैश्विक सहयोगियों के साथ संपर्क में है ताकि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें। उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारत इस संकट का मजबूती से सामना करेगा और देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।



















