कॉकरोच जनता पार्टी चींटी जनता पार्टी
---Advertisement---

बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप की ‘फाइनल डील’ बातचीत से मचा भूचाल

तेहरान ने अपनी सबसे बड़ी चाल चलते हुए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया और वहां से गुजरने वाली किसी भी आवाजाही पर रोक लगा दी। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा जो कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भर है।

परमाणु खतरे को खत्म करने पर अमेरिका और इजरायल की बड़ी सहमति

HIGHLIGHTS

  • अमेरिका-इजरायल ने ईरान को दिया कड़ा संदेश
  • हॉर्मुज खोलने को लेकर तेज हुई कूटनीति
  • ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
  • क्या ईरान झुकेगा? हॉर्मुज और परमाणु मुद्दे पर निर्णायक वार्ता
  • अमेरिका-इजरायल गठबंधन हुआ और मजबूत

Iran US War: इजरायल और अमेरिका के बीच रविवार को हुई अहम टेलीफोनिक वार्ता ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बातचीत के बाद एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ‘अंतिम समझौते’ की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। नेतन्याहू के शब्दों में इसे ‘सब फाइनल’ (All is final) करार दिया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि मध्य-पूर्व में चल रहा तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।

28 फरवरी का युद्ध और हॉर्मुज पर ईरान की पकड़

यह विकास ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य-पूर्व का पूरा क्षेत्र एक बड़े भू-राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। याद दिला दें कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने ईरान पर एक संयुक्त और भीषण हमला किया था। इस हमले ने न सिर्फ तेहरान को हिलाकर रख दिया था, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी की तरह था। हालांकि, इस हमले के बाद ईरान ने जो जवाबी कार्रवाई की, उसने युद्ध के परिणामों को और भी जटिल बना दिया।

तेहरान ने अपनी सबसे बड़ी चाल चलते हुए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया और वहां से गुजरने वाली किसी भी आवाजाही पर रोक लगा दी। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा जो कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भर है, वह गंभीर आर्थिक संकट में आ गया। तेल की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल और आपूर्ति श्रृंखला के टूटने से विश्व अर्थव्यवस्था सांस लेने को मजबूर हो गई।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और ठोस नतीजों का अभाव

हॉर्मुज की इस बंदी के बाद से ही दुनिया भर के देशों के बीच लगातार बातचीत का दौर जारी है। इस मामले में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई है और अमेरिका व ईरान के बीच पुल बनने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अभी तक इन वार्ताओं से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। अमेरिका साफ तौर पर यह चाहता है कि ईरान के पास परमाणु शक्ति नहीं होनी चाहिए, जबकि ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को एकतरफा और पक्षपातपूर्ण बताकर खारिज कर दिया है। ईरान का मूड बिल्कुल भी झुकने वाला नहीं दिख रहा है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी भी किसी समझौते की उम्मीद बांधे बैठे हैं।

नेतन्याहू और ट्रंप की ‘फाइनल’ रणनीति

इसी बीच रविवार को आई खबर ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टेलीफोन पर गहन चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते को लेकर आगे की रणनीति तय करना था।

नेतन्याहू ने कहा, “कल रात मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से हॉर्मुज को फिर से खुलवाने के समझौते और ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर अंतिम बातचीत के बारे में चर्चा की।” उनके इस बयान से साफ है कि दोनों देश अब सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे एक ‘अंतिम’ (Final) निष्कर्ष पर पहुंचने के मूड में हैं।

ऑपरेशन रोरिंग लायन और एपिक फ्यूरी पर नेतन्याहू ने जताया आभार

अपने बयान में नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा इजरायल की सुरक्षा के प्रति दिखाया गया समर्पण अटूट है। उन्होंने खास तौर पर ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) और ‘एपिक फ्यूरी’ (Epic Fury) के दौरान अमेरिका की भूमिका की सराहना की। याद रहे कि इन ऑपरेशन्स के दौरान अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरानी खतरे के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध के मैदान पर दोनों देशों की साझेदारी कभी भी इतनी मजबूत नहीं रही, जितनी आज है।

परमाणु खतरे को खत्म करने पर सहमति

इस बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस बात पर पूरी तरह से सहमत हुए कि ईरान के साथ होने वाला कोई भी भविष्य का समझौता परमाणु खतरे को पूरी तरह से खत्म करने वाला होना चाहिए।

नेतन्याहू ने स्पष्ट किया, “इसका मतलब है कि ईरान के परमाणु संवर्धन स्थलों को नष्ट कर दिया जाएगा और उसके पास मौजूद किसी भी संवर्धित परमाणु सामग्री को उसके क्षेत्र से बाहर निकाला जाएगा।” इसके साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने लेबनान सहित किसी भी मोर्चे पर आने वाले खतरों के खिलाफ खुद का बचाव करने के इजरायल के पूर्ण अधिकार की फिर से पुष्टि की।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now