The History of Fatwas : फतेही के गाने ‘सरके चुनर’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गाने को लेकर अश्लीलता के आरोप लगते ही अब इस मामले में एक नया मोड़ आया है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इफराहीन हुसैन ने नोरा फतेही के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है। मुफ्ती ने इस गाने को ‘गुनाह-ए-कबीरा’ (बड़ा पाप) करार दिया है। इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी नोरा फतेही, संजय दत्त और गीतकार रकीब आलम समेत अन्य को तलब किया था।
क्या है फतवा का मतलब?
भारत में फतवों का इतिहास काफी पुराना और विवादों से भरा रहा है, जिसकी शुरुआत मुगल काल से मानी जाती है। दरअसल, फतवा इस्लाम में एक धार्मिक राय या मार्गदर्शन होता है, जिसे मुफ्ती कुरान, हदीस या शरिया के आधार पर जारी करते हैं। भारतीय कानून के तहत फतवा बाध्यकारी नहीं होता और अदालतें इसे महज धार्मिक सलाह मानती हैं। लेकिन कई बार ऐसे फतवे जारी हुए हैं, जिसने समाज में भीषण बवाल मचा दिया। आइए, ऐसे ही कुछ प्रमुख मामलों पर नजर डालते हैं:
तस्लीमा नसरीन: एक फतवा, जिंदगीभर का निर्वासन
बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन पर फतवे का सबसे बड़ा असर देखने को मिला। 1993 में उनके उपन्यास ‘लज्जा’ के बाद बांग्लादेश में उनके सिर पर इनाम रख दिया गया था। 2006 में भारत के कोलकाता में भी उनकी हत्या का फतवा जारी किया गया, जिसके चलते उन्हें शहर छोड़ना पड़ा। आज भी वे निर्वासन का जीवन जी रही हैं।
सलमान रुश्दी: ‘सेटेनिक वर्सेज’ और करोड़ों का इनाम
बॉम्बे में जन्मे लेखक सलमान रुश्दी की किताब ‘द सेटेनिक वर्सेज’ को लेकर 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर ने मौत का फतवा जारी किया था। करोड़ों के इनाम के बावजूद वे ब्रिटेन में छिपकर रहे। 2022 में न्यूयॉर्क में उन पर चाकू से हमला भी किया गया, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं।
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इमराना मामला: पीड़िता को ही दोषी ठहराने वाला फतवा
2005 में मुजफ्फरनगर की इमराना के साथ उसके ससुर ने दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद दारुल उलूम देवबंद ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। फतवे में कहा गया कि बलात्कार के बाद इमराना अपने पति के लिए ‘मां समान’ हो गई है और उसे पति के साथ नहीं रहना चाहिए। इस फतवे की देशभर में जमकर आलोचना हुई। बाद में कोर्ट ने ससुर को 10 साल की सजा सुनाई।
जीवनशैली पर पाबंदियां
- डिजाइनर बुर्का: 2018 में देवबंद ने महिलाओं के टाइट और चमक-धमक वाले डिजाइनर बुर्के को हराम और प्रतिबंधित घोषित किया था।
- कार्टून देखना हराम: 2013 में यहां तक कहा गया कि बच्चों के लिए कार्टून देखना भी इस्लाम में वर्जित है, क्योंकि तस्वीर बनाना या बढ़ावा देना मना है।
‘भारत माता की जय’ का विवाद
2016 में दारुल उलूम देवबंद ने कहा था कि मुसलमानों के लिए ‘भारत माता की जय’ बोलना इस्लाम के अनुरूप नहीं है, क्योंकि इस्लाम में केवल अल्लाह की इबादत की जाती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया था कि ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का स्टैंड
फतवों की कानूनी वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ रहा है। अप्रैल 2025 में (और पहले 2014 में विश्व लोचन मदान मामले में) कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शरिया कोर्ट या दारुल कजा के फैसले कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं हैं। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह फतवे का पालन करना चाहता है या नहीं। अदालत का मानना है कि फतवा केवल एक धार्मिक राय है, जिसे देश का कानून मान्यता नहीं देता।



















