US-Iran War: पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। वैश्विक राजनीति के दो सबसे ताकतवर देश—अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक खुले युद्ध का रूप लेता दिख रहा है। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह करने की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं ईरान की सेना (IRGC) ने अमेरिका को एक ऐसी धमकी दी है जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने अपने हमले नहीं रोके, तो अमेरिकी धरती पर 11 सितंबर (9/11) जैसा भयानक हमला किया जाएगा। आइए इस बढ़ते तनाव को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आखिर यह मामला क्यों इतना गंभीर है।
ईरान की डरावनी चेतावनी
अमेरिका द्वारा लगातार बमबारी के बाद ईरान का गुस्सा फूट पड़ा है। ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को सीधा तौर पर धमकी दी है। ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी ‘तस्नीम’ के अनुसार, IRGC ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अगर यह युद्ध जारी रहा तो हम ऐसे ऑपरेशन चलाएंगे जिससे अमेरिका को पछताना पड़ेगा… अमेरिका में राष्ट्रीय शोक की स्थिति पैदा हो जाएगी।
ईरान ने क्यों दी 9/11 की धमकी?
ईरान की इस धमकी के पीछे एक खास वजह है। अमेरिकी इतिहास में आखिरी बार ‘राष्ट्रीय शोक’ की घोषणा 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों के बाद की गई थी। उस दिन आतंकवादियों ने 4 यात्री विमानों को हाइजैक किया था। दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (ट्विन टावर्स) से टकरा गए, जिससे 110 मंजिला ये इमारतें धरती पर आ गिरीं। तीसरा विमान अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) से टकराया और चौथा पेन्सिल्वेनिया में क्रैश हुआ। इस भयानक हमले में करीब 3,000 लोगों की जान गई थी। IRGC की तरफ से 9/11 का जिक्र करना मतलब सीधे तौर पर अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी और दर्द को छेड़ना है।
डोनाल्ड ट्रंप का सख्त अल्टीमेटम
वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को साफ-साफ चेतावनी दी है। ट्रंप खासतौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर बेहद नाराज़ हैं। (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल व्यापार मार्ग है, जहां से रोज़ाना लाखों बैरल कच्चा तेल गुजरता है)।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए लिखा है कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरू में किसी भी व्यापारिक जहाज पर हमला किया—चाहे वह मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी और हथियार से हो—तो अमेरिका ईरान के पुलों और पावर प्लांट्स को बम से उड़ा देगा। ट्रंप ने साफ किया कि तेहरान और उसके आसपास के बुनियादी ढांचे को अमेरिकी हमलों का प्रमुख निशाना बनाया जाएगा।
क्यों बढ़ा यह तनाव?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि युद्धविराम के लिए अमेरिका की पहली और सबसे बड़ी शर्त है कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर जहाजों पर हमले तुरंत बंद करने होंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों के दौरान ईरान ने 30 से भी ज्यादा जहाजों पर हमले किए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने जून में हुए युद्धविराम समझौते की धज्जियां उड़ा दी हैं।
इसके जवाब में अमेरिका ने पिछले 14 दिनों से ईरान पर लगातार मिसाइलें और बम गिराए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने इन दो हफ्तों में दक्षिणी ईरान में कई अहम पुलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है, ताकि ईरानी सेना की आवाजाही रुक सके।
परमाणु ठिकानों को लेकर बढ़ा खतरा
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि अब यह जंग सिर्फ कन्वेंशनल हथियारों तक सीमित नहीं रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर ईरान के अंडरग्राउंड (भूमिगत) परमाणु ठिकानों पर हमले की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले पहाड़ी परमाणु ठिकानों को निशाना बना सकता है।
हालांकि, ईरान ने इस धमकी को खारिज नहीं किया, बल्कि एक और खतरनाक बयान दिया। ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका ने उसके परमाणु सुविधाओं पर कोई हमला किया, तो ईरान इसे युद्ध के विस्तार के रूप में लेगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में वह सिर्फ अमेरिका को ही नहीं, बल्कि अमेरिका के सभी सहयोगी देशों को भी तबाह कर देगा।

























