दिल्ली के घरों की हवा बनी जानलेवा! IIT स्टडी में बड़ा खुलासा

Delhi Pollution News:आईआईटी के शोधकर्ताओं की ओर से की गई इस रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि दिल्ली के कई घरों के किचन में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से कई गुना अधिक है।

बाहर नहीं, घर के अंदर ज्यादा जहरीली है दिल्ली की हवा

HIGHLIGHTS

  • किचन में छिपा है मौत का धुआं! IIT रिसर्च से खुलासा
  • दिल्ली वालों सावधान! बंद घर भी नहीं बचा पा रहे प्रदूषण से
  • खाना बनाते समय बढ़ रहा है जहरीला खतरा
  • घर की रसोई बन रही ‘गैस चैंबर’
  • दिल्ली में Indoor Pollution बना Silent Killer

Delhi Pollution News: दिल्ली के वायु प्रदूषण (Air Pollution) को लेकर अक्सर लोगों को यह मान्यता होती है कि घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद करके वे इस जहरीले धुएं से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) द्वारा की गई एक नई स्टडी ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। शोध में खुलासा हुआ है कि दिल्ली के घरों की हवा, खासकर किचन (Kitchen) की हवा, सड़कों पर मौजूद प्रदूषण से कहीं ज्यादा खतरनाक और जहरीली हो सकती है।

खाना बनाते समय बढ़ता है खतरा

आईआईटी के शोधकर्ताओं की ओर से की गई इस रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि दिल्ली के कई घरों के किचन में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से कई गुना अधिक है। यह इनडोर पॉल्यूशन (Indoor Pollution) न केवल फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि दिल की बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन रहा है।

रिसर्च में सामने आया है कि घर के अंदर प्रदूषण का ग्राफ खाना बनाने के दौरान, खासकर सुबह और रात के समय अचानक तेजी से ऊपर चढ़ा जाता है। इस दौरान हवा में PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक महीन कणों की मात्रा इतनी बढ़ जाती है जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहें

शोध में घरेलू प्रदूषण बढ़ने के कई कारणों की पहचान की गई है:

  • दिल्ली के अधिकतर घरों में छोटे और बंद किचन होते हैं, जहां से धुएं के बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता।
  • कई घरों में चिमनी या एग्जॉस्ट फैन का अभाव है या यदि हैं भी तो वे प्रभावी ढंग से काम नहीं करते।
  • घर के अंदर अगरबत्ती जलाना और झाड़ू लगाने के दौरान उड़ने वाली धूल भी हवा को खराब करने में अहम भूमिका निभाती है।

अमीर या गरीब, सभी हैं खतरे में

स्टडी का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि यह समस्या केवल झुग्गी-झोपड़ी या कम आय वाले छोटे घरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों में भी इनडोर पॉल्यूशन का स्तर काफी अधिक पाया गया है। कई घरों की हवा में 70 से 80 प्रतिशत तक बहुत छोटे कण मौजूद थे, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं और शरीर को अंदर से कमजोर करते हैं।

इन तीन वर्गों को है सबसे ज्यादा खतरा

रिसर्च टीम ने चेतावनी दी है कि इस इनडोर पॉल्यूशन का सबसे बुरा असर तीन वर्गों पर पड़ रहा है:

  1. महिलाएं: जो अधिकतर समय रसोई में बिताती हैं और सीधे तौर पर इस धुएं के संपर्क में आती हैं।
  2. बुजुर्ग: जो अपना अधिकांश समय घर के अंदर ही रहते हैं।
  3. बच्चे: जिनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे हैं। उनके लिए यह प्रदूषण भविष्य में दिल और सांस की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकता है।

बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने सरकार और आम जनता दोनों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

  • खाना बनाते समय शेफ या खिड़कियां जरूर खुली रखें ताकि हवा का दबाव कम हो सके।
  • किचन में एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करें।
  •  सरकार को चाहिए कि वह कम आय वाले परिवारों के लिए बेहतर वेंटिलेशन और स्वच्छ ईंधन के सस्ते विकल्प उपलब्ध कराए।
  • लोगों को यह समझना होगा कि केवल बाहरी हवा से मास्क लगाके बचना काफी नहीं है, बल्कि घर के अंदर की हवा को साफ रखना भी जान बचाने के लिए जरूरी है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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