अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नेताओं की मीडिया इंटरैक्शन को लेकर प्लानिंग कितनी सटीक होती है, इसका एक चौंकाने वाला खुलासा हाल ही में सामने आया है। भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत सर्जियो गोर ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने विदेश मंत्रालय (MEA) की मीडिया मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी पर एक बार फिर से सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, साल 2019 में फ्रांस में आयोजित G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक से पहले भारतीय पक्ष ने एक खास शर्त रखी थी। भारत ने साफ तौर पर अमेरिका को संदेश दिया था कि इस मुलाकात के बाद पूरी तरह से खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस यानी पत्रकारों के सवाल-जवाब का कोई दौर नहीं होना चाहिए।
स्टेज के पीछे हुई थी खास बातचीत
‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में अपने संबोधन के दौरान सर्जियो गोर ने 17 जून को हुई उस ऐतिहासिक मुलाकात की पूरी बैकस्टोरी सुनाई। उन्होंने बताया कि जब दोनों नेताओं की मीटिंग शुरू होने से कुछ देर पहले वह स्टेज के पीछे अकेले डोनाल्ड ट्रंप के साथ थे। तभी ट्रंप ने उनसे पूछा कि क्या भारतीय टीम की कोई विशेष मांग है?
गोर ने ट्रंप को भारतीय विदेश मंत्रालय के उस रुख के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “भारत कोई आपत्ति नहीं करता अगर मीडिया कैमरों के लिए बुलाया जाए, लेकिन उन्हें पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं चाहिए।” गोर ने ट्रंप को स्पष्ट शब्दों में समझाया, “भारतीय प्रश्न पसंद नहीं करते।” इस पर ट्रंप ने कोई आपत्ति नहीं जताई और भारत की इस प्राथमिकता को मान लिया।
ट्रंप ने भूल गए ‘तय फॉर्मूला’
मंच पर जो कुछ हुआ, वह भारतीय टीम की प्लानिंग के उलट था। जब मोदी और ट्रंप एक-दूसरे के सामने बैठे, तो कमरे में लगभग 50 कैमरे मौजूद थे। शुरुआती दौर में सब कुछ उसी तरह संचालित हो रहा था जैसा भारत चाहता था—दोनों नेताओं ने अपने-अपने तय किए गए बयान पढ़े।
लेकिन बयान खत्म होने के बाद ट्रंप के दिमाग से शायद बैकस्टेज की वो बातचीत उतर गई। अचानक ट्रंप प्रेस की ओर मुड़े और पूछ बैठे, “कोई सवाल?” गोर के मुताबिक, इस एक पंक्ति ने पूरे माहौल को तबाह कर दिया। उन्होंने कहा, “इसके बाद सब कुछ खुल गया।”
45 मिनट का बना अनचाहा प्रेस कॉन्फ्रेंस
ट्रंप के इस एक सवाल ने एक छोटे से फोटो-ऑप को 45 मिनट के लंबे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल दिया। इस दौरान पत्रकारों ने कई तीखे और अप्रत्याशित सवाल पूछे, जिस पर दोनों नेताओं को तत्काल अपनी प्रतिक्रिया देनी पड़ी। गौरतलब है कि भारतीय प्रधानमंत्रियों का विदेशी धरती पर बिना किसी पूर्व तैयारी के खुले तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करना बेहद दुर्लभ है।
हालांकि, तब मंच पर कोई असहज स्थिति नजर नहीं आई थी, लेकिन अब सर्जियो गोर के इस खुलासे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उस वक्त भारतीय प्रतिनिधिमंडल कैसे चुपचाप उस 45 मिनट के सेशन का हिस्सा बना। अभी तक विदेश मंत्रालय या भारत सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

























