Women Reservation: लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 (महिला आरक्षण बिल) के दो-तिहाई बहुमत से गिरने के बाद भाजपा और एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने विपक्ष के खिलाफ तेज राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। बिल गिरने के कुछ ही घंटों के भीतर एनडीए ने आज से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान कर दिया है।
कैसे गिरा बिल?
बता दें कि शुक्रवार को लोकसभा में इस ऐतिहासिक बिल पर मतदान के दौरान सरकार को साधारण बहुमत तो मिला, लेकिन संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े से वह काफी पीछे रह गई। वोटिंग में 298 सदस्यों ने बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नतीजे की घोषणा करते हुए कहा कि संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो पाया, क्योंकि सदन में वोटिंग के दौरान इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया।
एनडीए की रणनीति: सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक
बिल के गिरने को लेकर भाजपा ने अपनी राज्य इकाइयों को तत्काल पूरे भारत में सभी जिला मुख्यालयों पर समन्वित प्रदर्शन करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लैंगिक समानता की दिशा में इस ऐतिहासिक कदम को रोकने में विपक्ष की भूमिका को बेनकाब करना है। एनडीए के सभी सहयोगी दलों को सोशल मीडिया और सड़कों पर जमकर प्रचार करने को कहा गया है।
महिला मोर्चा को मिली कमान
इस जमीनी अभियान की कमान भाजपा महिला मोर्चा को सौंपी गई है। पार्टी की वरिष्ठ महिला नेता और कार्यकर्ता सबसे आगे रहेंगे। उनका लक्ष्य अलग-अलग इलाकों की महिलाओं से सीधा जुड़कर उन्हें जागरूक करना और बिल के पक्ष में जनमत तैयार करना है।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बनेगा चुनावी मुद्दा
भाजपा इस मुद्दे को सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं रखने वाली है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले आगामी चुनावों में महिला आरक्षण को एक प्रमुख चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। पार्टी अपने समर्थन की तुलना विपक्ष के ‘रुकावट डालने वाले’ रवैये से करेगी।
2029 का लक्ष्य
पार्टी ने साफ किया है कि महिला आरक्षण बिल भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में लैंगिक समानता लाने का ऐतिहासिक कदम है। इन प्रदर्शनों के जरिए एनडीए यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि सरकार 2029 तक इसे लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जबकि विपक्ष महिलाओं को उनका हक दिलाने से रोक रहा है।
यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को लेकर एक नए और तीखे राजनीतिक युद्ध के शुरू होने का संकेत देता है। अब देखना होगा कि विपक्ष इस एनडीए के आक्रामक आंदोलन का क्या जवाब देता है।




















