West Bengal Assembly Elections : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान कथित पक्षपात और लापरवाही बरतने पर चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग के सख्त निर्देशों के बाद 23 अप्रैल को मतदान के दौरान ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की जानकारी हम आपको विस्तार के साथ बता रहे हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के सस्पेंड किए गए सभी पांचों अधिकारी संवेदनशील डायमंड हार्बर क्षेत्र से जुड़े हैं। इनमें एक आईपीएस (IPS) अधिकारी समेत एसडीपीओ और थाना प्रभारी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इन अधिकारियों के खिलाफ उपलब्ध सबूतों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए थे।
ये हैं सस्पेंड किए गए अधिकारी:
- संदीप गरई, आईपीएस, अतिरिक्त एसपी, डायमंड हार्बर
- सजल मंडल, एसडीपीओ, डायमंड हार्बर
- मौसम चक्रवर्ती, प्रभारी निरीक्षक, डायमंड हार्बर पुलिस स्टेशन
- अजय बाग, प्रभारी निरीक्षक, फाल्टा पुलिस स्टेशन
- सुभेच्छा बाग, प्रभारी अधिकारी, उस्ती पुलिस स्टेशन
एएसपी पर गिर सकती है और गाज
निलंबन सूची में सबसे प्रमुख नाम डायमंड हार्बर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) संदीप गराई का है। उनके खिलाफ पक्षपात और कदाचार के सबूतों को आधार बनाकर एक रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे जाने की संभावना है। इससे उनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई हो सकती है।

डायमंड हार्बर के एसपी को चेतावनी
चुनाव आयोग ने सिर्फ जूनियर अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों पर भी डंडा चलाया है। डायमंड हार्बर की पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. ईशानी पाल को कड़ी चेतावनी जारी की गई है। आयोग ने साफ तौर पर कहा कि चुनाव जैसे संवेदनशील दौर में अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा अनुशासनहीनता और पक्षपापूर्ण काम करने को रोकने में SP पूरी तरह से विफल रही हैं।
23 अप्रैल को हुई थी हिंसा
दरअसल, 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर पहले चरण के मतदान के दौरान कई जगहों से छिटपुट झड़प और हिंसा की खबरें सामने आई थीं। कुछ स्थानों पर भाजपा के उम्मीदवारों पर हमले किए गए थे, जिसमें एक उम्मीदवार के साथ दौड़ा-दौड़ाकर मारपीट की गई थी। इन घटनाओं के बाद से ही चुनाव आयोग ने प्रशासनिक मशीनरी पर नजर सख्त कर दी थी और निष्पक्षता न बरतने वाले अधिकारियों को बख्शने का फैसला लिया था।
चुनाव आयोग के इस एक्शन के बाद से प्रदेश प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है और माना जा रहा है कि आगामी चरणों के चुनाव में पुलिस प्रशासन को और अधिक सतर्कता बरतनी होगी।

























