तेलंगाना की कांग्रेस सरकार में बुधवार को बड़ा राजनीतिक एक्शन देखने को मिला। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने राज्य की वन एवं पर्यावरण मंत्री कोंडा सुरेखा को तुरंत प्रभाव से कैबिनेट से बाहर करने की सिफारिश राज्यपाल को भेज दी। इस कड़े कदम की वजह बनी मंत्री की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ किए गए आरोप और विवादित टिप्पणियां। मामला जिस तेजी से बढ़ा, उसने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, वरिष्ठ मंत्री कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने हाल ही में वारंगल जिले के परकल में अपनी मां के जन्मदिन के समारोह के दौरान स्टेज से बयानबाजी कर डाली। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनके परिवार के करीबी लोग उन लोगों को भूल गए हैं, जिन्होंने कभी उनके राजनीतिक सफर में मदद की थी। इतना ही नहीं, सुष्मिता ने CM पर शेल कंपनियों के जरिए राज्य की संपदा को लूटने के गंभीर आरोप भी लगा दिए।
एक मंत्री की बेटी का सरकार के मुखिया पर इस तरह हमला करना कांग्रेस के लिए बर्दाश्त से बाहर था। विडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला आग की तरह फैल गया और पार्टी के अंदरूनी विवाद सबके सामने आ गया।
विधायकों ने उठाई एक्शन की मांग
सुष्मिता के बयान के बाद तेलंगाना कांग्रेस के कई विधायक भड़क उठे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से मांग की कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और अन्य नेताओं के खिलाफ की गई इन टिप्पणियों पर सख्त रुख अपनाया जाए और दोषी पक्ष के खिलाफ अनुशासनहीनता का मामला बनाया जाए। दबाव के बीच मामले को पार्टी की अनुशासन समिति के पास भेजा गया, जहां से इस घटनाक्रम ने और तेजी पकड़ ली।
खरगे से मिली सुरेखा, कहा- पार्टी ने दिया भरोसा
इस बीच, कोंडा सुरेखा बुधवार को दिल्ली पहुंची और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से लंबी मुलाकात की। मीटिंग के बाद सुरेखा ने पत्रकारों से कहा कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उचित सोच-विचार के बाद ही कोई भी निर्णय लिया जाएगा।
उनका यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा था कि वे पार्टी में अपने साथ हो रहे बार्तावलाप से संतुष्ट हैं। लेकिन दिल्ली से लौटते ही उनके लिए खबर किसी और ही रंग की थी — मुख्यमंत्री ने कैबिनेट से हटाने की सिफारिश राज्यपाल को भेज दी।
कैबिनेट में लंबे समय से चल रही थी अनबन
जानकारों के मुताबिक, कोंडा सुरेखा और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बीच तालमेल की कमी की चर्चाएं काफी समय से चल रही थीं। सुरेखा कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर करती रही हैं। बेटी का बयान इसी अनबन का नतीजा माना जा रहा है, जिसने पार्टी हाईकमान की धैर्य की परीक्षा ली और आखिरकार एक्शन लेना पड़ा।
CM ने चिन्ना रेड्डी की नियुक्ति भी रद्द की
मंत्री को हटाने के साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से कई और बड़े प्रशासनिक बदलावों की घोषणा भी की गई। CMO के अनुसार, डॉ. जी. चिन्ना रेड्डी की तेलंगाना योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष के पद पर हुई नियुक्ति को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। उनकी जगह गडवाल विजयलक्ष्मी को योजना बोर्ड का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने नेरेला शारदा को तेलंगाना राज्य महिला आयोग, हैदराबाद का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, पूर्व सांसद (राज्यसभा) जी. सुधा रानी को काकतीय शहरी विकास प्राधिकरण (KUDA) की अध्यक्ष बनाया गया है। एक साथ इतने बदलाव करने से साफ है कि सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर बड़ी सफाई की तैयारी में है।
पार्टी का सख्त संदेश, सियासी समीकरण बदलेगा?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह फैसला कांग्रेस की ओर से एक स्पष्ट संदेश है कि कोई भी नेता चाहे वह किसी भी पद पर हो, पार्टी अनुशासन और मुख्यमंत्री की छवि के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। हालांकि, कोंडा सुरेखा और उनके पति कोंडा माधव रेड्डी राज्य की सियासत में अपना अलग पहचान रखने वाले नेता माने जाते हैं, ऐसे में यह एक्शन आने वाले दिनों में पार्टी के लिए सिरदर्द भी बन सकता है।
अब सबकी निगाहें राज्यपाल के फैसले और कोंडा सुरेखा के अगले कदम पर हैं। यह भी देखा जाएगा कि सुरेखा कैंप पार्टी में बने रहता है या विरोध का नया रास्ता चुनता है। तेलंगाना की सियासत में यह घटनाक्रम निश्चित रूप से कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों को नई दिशा देगा।

























