जयपुर निगम चुनाव में सियासी भूचाल, भाजपा खेलेगी 8 मुस्लिम कार्ड

जयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर नए समीकरण बनाए हैं। जानिए पूरी लिस्ट और वार्ड 19 से क्यों उठ रही सबसे ज्यादा चर्चा।

महिलाओं समेत 8 मुस्लिम उम्मीदवार, भाजपा का निगम चुनाव गणित

HIGHLIGHTS

  • भाजपा का बड़ा दांव, जयपुर निगम में 8 मुस्लिम उम्मीदवार
  • सामान्य सीट से मुस्लिम चेहरा, भाजपा के दांव पर नजर
  • कांग्रेस गढ़ में सेंध, भाजपा ने उतारे 8 मुस्लिम प्रत्याशी
  • वार्ड 19 से शहनवाज अंसारी, जानें भाजपा की पूरी रणनीति

जयपुर नगर निगम चुनाव की सियासत गरमाते ही भाजपा ने टिकट वितरण के दौरान एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने शहर के राजनीतिक पारे को बदलकर रख दिया है। पार्टी ने इस बार एक-दो नहीं, बल्कि आठ मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनावी रण में उतारा है। पिछले निगम चुनावों के इतिहास पर नजर डालें, तो भाजपा की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय को इतनी बड़ी संख्या में मौका देना खुद में अपवाद माना जा रहा है। यही कारण है कि फैसले के बाद से शहर के सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार गरम है।

भाजपा ने किन चेहरों पर जताया भरोसा?

पार्टी ने अल्पसंख्यक बहुल और कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में स्थानीय चेहरों को वरीयता दी है। टिकट पाने वाले प्रत्याशियों की पूरी सूची इस प्रकार है वार्ड 19 शहनवाज अंसारी, वार्ड 109 जाकिर खान कायमखानी, वार्ड 113फरीदुद्दीन ‘जैकी’, वार्ड 117 शब्बो जहां, वार्ड 128 माजिद पठान, वार्ड 136 मिजाना मिर्जा, वार्ड 137 रहीस मंसूरी, वार्ड 146 अफसाना, इस सूची से साफ है कि पार्टी ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों को स्थान दिया है और शहर के अलग-अलग इलाकों के जमीनी नेतृत्व पर भरोसा किया है।

वार्ड 19: सामान्य सीट से मुस्लिम प्रत्याशी

पूरी सूची में सबसे अधिक हलचल वार्ड 19 को लेकर मची हुई है। वजह साफ है—यह सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की सीट है, और आमतौर पर अनारक्षित सीटों पर पार्टियां बहुसंख्यक समुदाय के प्रत्याशियों को ही आगे बढ़ाती रही हैं। ऐसे में यहां से शहनवाज अंसारी को मौका देना भाजपा की रणनीति का सबसे बड़ा संदेश माना जा रहा है।

समझा जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरों को वरीयता देना चाहता है, जिनकी अपने इलाके में व्यक्तिगत पहचान, सामाजिक स्वीकार्यता और स्थानीय नेटवर्क मजबूत हो। अंसारी का चुनाव इसी लॉजिक पर आधारित बताया जा रहा है।

भाजपा के कदम का सियासी गणित

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह कोशिश सीधे तौर पर कांग्रेस के पारंपरिक अल्पसंख्यक वोट बैंक पर सेंध लगाने की तैयारी है। जयपुर के मुस्लिम बहुल वार्डों में ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस की पकड़ देखी गई है। ऐसे में स्थानीय मुस्लिम चेहरों को टिकट देने का मकसद उन मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाना है, जो अब तक पार्टी के प्रत्यक्ष संवाद की दायरे से बाहर रहे हों।

एक दूसरा पहलू भी जरूरी है। निगम चुनावों में वार्ड स्तर की व्यक्तिगत पकड़ ही निर्णायक होती है। बड़े नेताओं की तस्वीरों की जगह उम्मीदवार की अपनी पहचान और इलाके से जुड़ाव वोट तय करता है। भाजपा ने इसी सूत्र का फायदा उठाते हुए जमीन से जुड़े अल्पसंख्यक चेहरों को आगे लाया है।

प्रत्याशियों के सामने दोहरा इम्तिहान

चुनावी मैदान में उतर चुके इन प्रत्याशियों के सामने चुनौती दोतरफा है। पहली चुनौती अपनी ही पार्टी के पारंपरिक मतदाताओं का भरोसा हासिल करने की है, तो दूसरी चुनौती अपने समुदाय के भीतर स्वीकार्यता बनाने की। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या समुदाय के मतदाता पार्टी की आदर्शवादी अपील को वोट में बदलते दिखेंगे, या कांग्रेस का पुराना वर्चस्व कायम रहेगा।

इन सबके अलावा बूथ स्तर का संगठन, वार्ड स्तरीय प्रचार-प्रसार और स्थानीय मुद्दों पर उम्मीदवार की पकड़ इन सीटों के नतीजे तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

क्या समीकरण बदलेंगे? फैसला मतदाताओं के हाथ

भाजपा के इस प्रयोग को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी ने टिकट वितरण को किसी औपचारिक बयान या राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ने से बचा है। पार्टी का तर्क जितना साफ-सुथरा हो, व्यवहारिक स्तर पर नतीजे मतदाताओं के रुझान पर तय होंगे। जयपुर के निगम चुनाव में आठ मुस्लिम प्रत्याशियों की उपस्थिति कितने वार्डों का गणित बदल पाती है, यह आने वाले दिनों का बड़ा सवाल है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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