उपराष्ट्रपति ने लॉन्च किया खास बीज, पलटेगी किसानों की तकदीर

दशकों से भारत उच्च क्वालिटी वाले पॉपकॉर्न के लिए विदेशी हाइब्रिड तकनीक और बीजों पर निर्भर था। इससे न केवल देश का बड़ा पैसा विदेशी मुद्रा के रूप में बाहर जा रहा था, बल्कि घरेलू किसानों को भी इसका आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा था।

विदेशी बीजों से मुक्ति! भारत का पहला पॉपकॉर्न बीज लॉन्च

HIGHLIGHTS

  • आंध्र प्रदेश से नई क्रांति! लॉन्च हुआ पहला देसी बीज
  • जीएमओ-फ्री पॉपकॉर्न बीज! भारत ने वैश्विक बाजार में मारी एंट्री
  • विदेशी बीजों का बहिष्कार! लॉन्च हुआ भारत का अपना बीज
  • हजारों किसानों को लाभ! भारत का पहला गैर-जीएमओ बीज लॉन्च

भारतीय कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया गया है। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले स्थित मुसुनुरु में देश का पहला ‘गैर-जीएमओ उच्च गुणवत्ता वाला पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज’ आधिकारिक रूप से जारी किया है। यह घटना न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे देश के कृषि इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

आयातित तकनीक से मुक्ति का रास्ता

दशकों से भारत उच्च क्वालिटी वाले पॉपकॉर्न के लिए विदेशी हाइब्रिड तकनीक और बीजों पर निर्भर था। इससे न केवल देश का बड़ा पैसा विदेशी मुद्रा के रूप में बाहर जा रहा था, बल्कि घरेलू किसानों को भी इसका आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा था। उपराष्ट्रपति ने इस नई स्वदेशी तकनीक को इस चक्रव्यूह को तोड़ने वाला एक बेहद प्रभावशाली कदम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गैर-जीएमओ बीज वैश्विक बाजारों में मजबूती से मुकाबला करने की क्षमता रखता है।

किसान-उद्यमी साझेदारी का बेजोड़ मॉडल

इस अनूठी उपलब्धि के पीछे ‘गॉरमेट पॉपकॉर्निका’ की कड़ी मेहनत और दूरदर्शी सोच काम कर रही है। उपराष्ट्रपति ने इस संस्था के संस्थापक श्री एसबीपी पट्टाभि रामाराव के प्रयासों की खूब प्रशंसा की। एक छोटे स्थानीय उद्यम से निकलकर यह संस्था आज पॉपकॉर्न मक्का प्रसंस्करण का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है।

इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सिर्फ बीज बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत ‘किसान-उद्यम साझेदारी’ है। वर्तमान में 8 विभिन्न राज्यों के लगभग 17,500 से अधिक किसान इससे जुड़कर करीब 40,000 एकड़ भूमि पर इस मक्के की खेती कर रहे हैं। इससे हजारों परिवारों को बाजार तक सीधी पहुंच और आय में भारी इजाफा हुआ है। इस उपलब्धि पर आंध्र प्रदेश समेत सात अन्य राज्यों के बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया।

प्रौद्योगिकी और स्वदेशी बीजों पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि किसान राष्ट्र की रीढ़ हैं और भारत की सभ्यता और संस्कृति की नींव कृषि पर ही टिकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा। आधुनिक प्रौद्योगिकी, लगातार नवाचार और स्वदेशी बीजों के विकास पर ही ध्यान केंद्रित करना होगा।

उन्होंने एक प्रेरणादायक विचार रखते हुए कहा कि किसानों द्वारा जोती गई मिट्टी की ताकत, वैज्ञानिकों की मेहनत से तैयार बेहतरीन बीजों और उद्यमियों की सोच से मिलकर एक नया और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा।

केंद्र और राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों की तारीफ

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कई महत्वपूर्ण योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’, ‘पीएम फसल बीमा योजना’, ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन’ और ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी पहलों को किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए कारगर बताया।

इसके साथ ही, उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने राज्य में चल रहे ‘रायथु बाजार’ को किसानों को उचित दाम दिलाने वाला एक उत्कृष्ट प्लेटफॉर्म बताया। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा बागवानी, प्राकृतिक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने और किसान-केंद्रित सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।

फैक्ट्री और कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण

बीज विमोचन कार्यक्रम के बाद उपराष्ट्रपति ने ‘गॉरमेट पॉपकॉर्निका’ की फैक्ट्री और उसके आधुनिक कोल्ड स्टोरेज यूनिट का निरीक्षण किया। यहां उन्हें मक्के की फसल कटने के बाद होने वाली प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने मक्के की गुणवत्ता जांच (Quality Control), आधुनिक पैकेजिंग तकनीक और बड़े पैमाने पर भंडारण की व्यवस्था को देखा। फसल को खराब होने से बचाने के लिए बनाई गई इस इंफ्रास्ट्रक्चर चेन की उन्होंने काफी सराहना की।

नेतृत्व और भविष्य की दिशा

यह गौरवशाली कार्यक्रम कृषि, प्रौद्योगिकी और नीति निर्माताओं के एक अनूठे मिलन स्थल के रूप में सामने आया। इस दौरान आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस. अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री श्री नारा लोकेश, श्री किंजरापु अचन्नाइडु तथा श्री कोलुसु पार्थसारथी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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