भारत नेपाल पुल उद्घाटन से पहले बोर्ड पर मचा बड़ा बवाल

भारत-नेपाल सीमा विवाद मामला सामने आने के बाद दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। विवाद की वजह पुल की संरचना या निर्माण नहीं, बल्कि साइनबोर्ड पर दर्ज स्थान के नाम को बताया जा रहा है।

भारत नेपाल पुल के बोर्ड पर विवाद, प्रशासन ने ढका

HIGHLIGHTS

  • नेपाल में भड़का गुस्सा, भारत के पुल पर छिड़ा विवाद
  • भारत नेपाल सीमा पर पुल को लेकर क्यों मचा हंगामा
  • उद्घाटन से पहले भारत नेपाल पुल पर क्यों छाया विवाद
  • नेपालियों के विरोध से ढका गया पुल का विवादित साइनबोर्ड

भारत और नेपाल को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण मोटर पुल के औपचारिक उद्घाटन से पहले ही सीमा क्षेत्र में विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड के धारचूला क्षेत्र में छारछुम के पास बनाए गए इस मोटर पुल के नेपाल छोर पर लगाए गए साइनबोर्ड को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। नेपाली नागरिकों के विरोध के बाद नेपाल प्रशासन को विवादित बोर्ड पर काली पन्नी लगाकर उसे ढकना पड़ा।

मामला सामने आने के बाद दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। विवाद की वजह पुल की संरचना या निर्माण नहीं, बल्कि साइनबोर्ड पर दर्ज स्थान के नाम को बताया जा रहा है। नेपाल के स्थानीय लोगों का कहना है कि बोर्ड पर उनके क्षेत्र की स्थानीय पहचान को उचित स्थान नहीं दिया गया।

उद्घाटन से पहले ही क्यों शुरू हुआ विवाद?

धारचूला के नजदीक छारछुम में भारत और नेपाल के बीच आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए मोटर पुल का निर्माण किया गया है। इसे दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। पुल के तैयार होने के बाद इसके औपचारिक उद्घाटन की तैयारी चल रही थी।

इसी दौरान नेपाल की तरफ लगाए गए स्वागत साइनबोर्ड को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि बोर्ड पर जिस स्थान का नाम दर्ज किया गया, उसमें नेपाल के स्थानीय क्षेत्र की पहचान को लेकर आपत्ति जताई गई। स्थानीय लोगों ने मांग की कि नेपाल की तरफ मौजूद संबंधित इलाके का नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

विरोध बढ़ने के बाद प्रशासन ने फिलहाल बोर्ड को काली पन्नी से ढक दिया। इससे साफ है कि प्रशासन विवाद को तत्काल शांत करने और दोनों पक्षों के बीच किसी तरह के तनाव से बचने की कोशिश कर रहा है।

110 मीटर लंबा है भारत-नेपाल मोटर पुल

छारछुम में बनाया गया यह मोटर पुल करीब 110 मीटर लंबा है। यह डबल स्पान मोटर पुल है, जिसे भारत और नेपाल के बीच मालवाहक वाहनों की आवाजाही को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

इस परियोजना का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। जानकारी के अनुसार पुल को तैयार करने में लगभग 32 करोड़ 98 लाख रुपये की लागत आई है। सीमावर्ती क्षेत्र के लिए यह पुल रणनीतिक और व्यापारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुल के माध्यम से दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। खासतौर पर सामान की आवाजाही आसान होने से स्थानीय कारोबार और सीमा पार व्यापार को भी फायदा मिल सकता है।

चार साल बाद भी शुरू नहीं हुई नियमित आवाजाही

पुल का निर्माण करीब चार साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन अब तक इस पर नियमित मोटर आवाजाही शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में इसके औपचारिक उद्घाटन को लेकर दोनों देशों की तरफ उम्मीदें बनी हुई हैं।

हालांकि उद्घाटन से ठीक पहले साइनबोर्ड को लेकर पैदा हुआ विवाद नई चुनौती बन गया है। सीमावर्ती इलाकों में स्थानों के नाम और स्थानीय पहचान का मुद्दा संवेदनशील माना जाता है। इसलिए प्रशासन इस मामले को जल्द सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

नेपाली नागरिकों ने जताई नाराजगी

नेपाल की तरफ स्थानीय लोगों ने साइनबोर्ड में स्थान के नाम को लेकर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि बोर्ड पर नेपाल के स्थानीय क्षेत्र के नाम को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। विरोध करने वाले लोगों ने इसे स्थानीय पहचान की अनदेखी से जोड़कर देखा।

स्थानीय स्तर पर विरोध और हंगामे की स्थिति बनने के बाद नेपाल प्रशासन ने विवादित बोर्ड को ढक दिया। माना जा रहा है कि संबंधित एजेंसियों के बीच बातचीत के बाद साइनबोर्ड पर नाम को सही तरीके से दर्ज किया जाएगा।

नेपाल प्रशासन ने क्या कहा?

मामले पर नेपाल के दार्चुला जिले के जिलाधिकारी वर्तराज पौडेल की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में धारचूला के एसडीएम से बातचीत की गई है।

नेपाल प्रशासन के अनुसार मोटर पुल का निर्माण करने वाली कंपनी के सब-इंजीनियर ने साइनबोर्ड तैयार करते समय नाम में गलती होने की बात स्वीकार की है। कंपनी की तरफ से इसे जल्द ठीक करने की बात भी कही गई है।

इस बयान से संकेत मिलता है कि फिलहाल विवाद को किसी बड़े राजनयिक या सीमा विवाद के बजाय साइनबोर्ड पर हुई कथित गलती से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय नाम और पहचान से जुड़े मुद्दे संवेदनशील होने के कारण इस मामले ने तूल पकड़ लिया।

व्यापार और कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम है पुल

भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं रोजमर्रा की आवाजाही के साथ-साथ व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

छारछुम का यह मोटर पुल भी इसी लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसके जरिए दोनों देशों के बीच मालवाहक वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने की योजना है। पुल पर यातायात शुरू होने के बाद सीमावर्ती कारोबारियों और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि साइनबोर्ड को लेकर पैदा हुआ विवाद कितनी जल्दी सुलझता है और पुल का औपचारिक उद्घाटन कब होता है। नेपाल प्रशासन और निर्माण एजेंसी की ओर से नाम संबंधी गलती सुधारने की बात कही गई है। ऐसे में उम्मीद है कि विवादित बोर्ड को जल्द बदलकर दोनों देशों की स्थानीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नया साइनबोर्ड लगाया जाएगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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