UP News: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था, ऊर्जा विभाग में चल रहे आंतरिक विवाद और आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
अजय राय ने अपने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश में इस समय ऊर्जा विभाग के भीतर गहरे प्रशासनिक मतभेद, संस्थागत टकराव और नियामक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशें देखने को मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही प्रदेश की जनता पर अब बिजली दरों में बढ़ोतरी और फ्यूल सरचार्ज का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जिससे लोगों की आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं।
ऊर्जा विभाग के भीतर टकराव पर जताई चिंता
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हाल के दिनों में ऊर्जा विभाग से जुड़े विवाद लगातार समाचार पत्रों और मीडिया की सुर्खियां बने हुए हैं। उनका मानना है कि यह मामला केवल बिजली आपूर्ति या तकनीकी समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन-प्रशासन के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी, जवाबदेही के अभाव और जनहित से जुड़े निर्णयों में गंभीर खामियों को उजागर करता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता भीषण गर्मी के दौरान लगातार बिजली संकट का सामना कर रही है। कई क्षेत्रों में बिजली कटौती और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे समय में सरकार के भीतर ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के बीच सार्वजनिक रूप से सामने आया विवाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के बीच बढ़ा विवाद
अजय राय ने पत्र में उल्लेख किया कि स्वयं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री द्वारा पावर कॉर्पोरेशन के शीर्ष अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऊर्जा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि विभाग में नई भर्तियों, कर्मचारियों की छंटनी, प्रशासनिक निर्णयों और फ्यूल सरचार्ज जैसे महत्वपूर्ण मामलों में उनकी जानकारी के बिना फैसले लिए जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि किसी विभाग का मंत्री मीडिया के सामने यह कहने को मजबूर हो जाए कि विभाग के बड़े निर्णय उसकी जानकारी के बिना लिए जा रहे हैं, तो यह सामान्य प्रशासनिक असहमति नहीं बल्कि शासन व्यवस्था में गंभीर संकट का संकेत है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का नियंत्रण प्रशासनिक तंत्र पर कमजोर पड़ गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका पर सवाल
अपने पत्र में अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा है कि यदि ऊर्जा मंत्री द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं, तो मुख्यमंत्री ने अब तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि ऊर्जा मंत्री को मुख्यमंत्री का पूरा समर्थन प्राप्त है और उनके आरोप तथ्यात्मक हैं, तो पावर कॉर्पोरेशन के जिम्मेदार अधिकारियों को अब तक निलंबित क्यों नहीं किया गया। वहीं यदि ऊर्जा मंत्री के आरोप निराधार हैं, तो उन्हें इतने महत्वपूर्ण पद पर बनाए रखने का औचित्य क्या है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इन सवालों का जवाब प्रदेश की जनता जानना चाहती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा हुआ है।
फ्यूल सरचार्ज और बिजली व्यवस्था की जांच की मांग
अजय राय ने पत्र में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की विफलताओं और उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज की भी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है और इसकी पारदर्शी जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों, पावर कॉर्पोरेशन की कथित मनमानी कार्यप्रणाली और विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों की अनदेखी जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र के अंत में ऊर्जा विभाग में भर्ती, छंटनी और आरक्षण संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन की भी जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा हो सके।
अजय राय का कहना है कि प्रदेश की जनता को पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था का अधिकार है। ऐसे में ऊर्जा विभाग से जुड़े विवादों और आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि जनता के हितों की रक्षा की जा सके।
अब इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस पत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या प्रदेश की बिजली व्यवस्था तथा ऊर्जा विभाग से जुड़े विवादों की जांच के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।























