UP : कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश

कानपुर के अस्पतालों में चल रहा था खूनी खेल (फाइल फोटो)

UP Kanpur Kidney Gang News : उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का एक बड़ा और संगठित रैकेट सक्रिय मिला है। इस रैकेट में गरीब और आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को लालच देकर उनकी किडनी महज 10 लाख रुपये में खरीदी जा रही थी, जिसे बाद में नौकरशाही और अमीर मरीजों को 90 लाख रुपये से अधिक की भारी रकम में बेच दिया जाता था।

क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने देर रात शहर भर में छापेमारी कर इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। रावतपुर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के संचालकों, एक डॉक्टर दंपती और कई बिचौलियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।

यूं काम करता था रैकेट का नेटवर्क

बता दें कि जांच में सामने आए तथ्यों से पुलिस भी सकते में है। कल्याणपुर क्षेत्र के आवास विकास-3 निवासी शिवम अग्रवाल नामक बिचौलिए ने उत्तराखंड के एक युवक को आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए 10 लाख रुपये का लालच दिया। युवक को भरोसा दिलाया गया कि उसकी किडनी किसी रिश्तेदार के लिए दी जा रही है।

रावतपुर के एक अस्पताल में सर्जरी कर युवक की किडनी निकाल ली गई। इसके बाद इसी किडनी को मुजफ्फरनगर की 35 वर्षीय एक महिला के परिजनों को 90 लाख रुपये से अधिक में ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध करा दिया गया। हालांकि, डोनर युवक को 10 लाख में से महज 6 लाख रुपये नकद और 3.5 लाख रुपये का चेक दिया गया। बाकी की रकम के लिए उसे लगातार टालमटोल की गई।

पहचान छिपाने के लिए अस्पताल बदलने का ‘सुनियोजित’ खेल

रैकेट से जुड़े लोगों ने शक को बचने के लिए पूरी योजना बनाई थी। ऑपरेशन के बाद डोनर और मरीज दोनों को एक दिन तक उसी अस्पताल में रखा गया, उसके बाद दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। डोनर ने अपनी पहचान छुपाने के लिए खुद को ‘आयुष’ नाम से मेरठ का निवासी बताया, लेकिन बाद में पूछताछ में उसने अपने बिहार (समस्तीपुर) के होने की बात स्वीकार की।

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50 हजार रुपये के विवाद ने खोली रैकेट की पोल

इस बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का खुलासा एक छोटी सी रकम के विवाद से हुआ। डोनर को तय रकम से 50 हजार रुपये कम दिए गए और बाकी पैसों के लिए बेवजह टाल दिया गया। लगातार भरमार का शिकार होकर युवक पुलिस के पास पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को डोनर ने बताया कि वह एक एमबीए का छात्र है और शुरू में उसने 4 लाख रुपये में किडनी बेचने की बात कही थी, लेकिन बाद में 10 लाख पर सौदा तय हुआ। इस शिकायत ने पुलिस की जांच का रुख बदल दिया और रैकेट की परतें खुलने लगीं।

कई अस्पतालों पर छापे, बड़े खुलासे की आशंका

क्राइम ब्रांच ने शहर में प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल समेत कई जगहों पर छापेमारी की है। यहां से किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े अहम दस्तावेज और मरीजों के रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक किडनी ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इसी तरह के एक अन्य मामले में एक छात्रा से भी कम कीमत पर किडनी डोनेट करवाने की बात सामने आई है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की गहराई से जांच में जुटे हुए हैं और माना जा रहा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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