कॉकरोच जनता पार्टी नोएडा- गाजियाबाद चींटी जनता पार्टी बिल्डर पंजाब-हरियाणा बिहार-झारखंड क्राइम न्यूज़ फिल्म न्यूज राजनीतिक न्यूज लाइफस्टाइल जरा हटके खेल जर्नल नॉलेज

---Advertisement---

उद्धव ठाकरे की इमरजेंसी मीटिंग से महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

Maharashtra News: सभी की निगाहें 14 जून को मातोश्री में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। क्या उद्धव ठाकरे अपने बागी सांसदों को मना पाएंगे? क्या वे कोई बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं? या फिर शिंदे गुट के दावों के बाद यह बैठक सिर्फ 'संकट मोचन' के लिए है?

मातोश्री में 14 जून की बैठक पर टिकी महाराष्ट्र की सियासी निगाहें (फाइल फोटो)

HIGHLIGHTS

  • क्या फिर होगी बगावत?
  • ठाकरे कैंप में बढ़ी टेंशन
  • शिंदे के दावों से हड़कंप
  • मातोश्री में बड़ी बैठक
  • उद्धव ने सांसदों को तलब किया

Maharashtra News: महाराष्ट्र के सियासी समीकरण एक बार फिर से गर्मा गए हैं। राज्य की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया, जब शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पार्टी के सभी सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। यह बैठक 14 जून को मातोश्री (उद्धव ठाकरे का आवास) में आयोजित की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों और जनता के बीच एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक इस इमरजेंसी मीटिंग की क्या वजह है? क्या महाराष्ट्र की सियासत में कोई बड़ा खेल देखने को मिलने वाला है? क्या 2022 का विद्रोह एक बार फिर दोहराने वाला है? आइए, समझते हैं पूरे मामले की तह तक।

आपातकालीन बैठक का पीछे का ‘सच’

दरअसल, उद्धव ठाकरे के लिए चिंता का विषय उनके ही गुट के कुछ सांसदों का रवैया बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से लगातार खबरें सामने आ रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कई बड़े नेता और सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। यह खबरें ठाकरे गुट के लिए किसी बड़े खतरे की तरह हैं, क्योंकि 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह ने उद्धव ठाकरे को सत्ता से बाहर कर दिया था।

सूत्रों की मानें तो, पार्टी की अनुशासनहीनता को लेकर यह बैठक बुलाई गई है। खास तौर पर परभणी लोकसभा सीट से सांसद संजय उर्फ बंडू जाधव की बगावती तेवर ने पार्टी आलाकमान की नींद उड़ा दी है। संजय जाधव पिछली कई अहम बैठकों में शामिल नहीं हुए और न ही पार्टी कार्यक्रमों में दिखाई दिए। उनकी इस गैरहाजिरी ने कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं वे भी शिंदे गुट के संपर्क में तो नहीं हैं। 14 जून की बैठक में संजय जाधव के आने या न आने पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

शिंदे गुट के साथ मुलाकातों ने बढ़ाई टेंशन

पिछले दिनों हुई कुछ मुलाकातों ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। शिवसेना (यूबीटी) के कई दिग्गज नेताओं को शिंदे खेमे के नेताओं के साथ देखा गया है, जिसे सामान्य शिष्टाचार नहीं माना जा रहा है।

  1. नागेश बापुराव (हिंगोली): हिंगोली से सांसद नागेश बापुराव की डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात ने सियासी गलियारों में चर्चा बटोरी।
  2. राजाभाऊ वाजे (नासिक): नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे का डिप्टी सीएम शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे से मिलना भी संदेह के घेरे में है।
  3. भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी): शिरडी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे की महाराष्ट्र के मंत्री और शिंदे गुट के नेता उदय सामंत के साथ तस्वीरें सामने आई हैं।

इन सभी मुलाकातों के बाद शिंदे गुट के नेता खुलेआम दावा कर रहे हैं कि ठाकरे गुट के कई और नेता उनसे संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा खेल देखने को मिलेगा। इन दावों के बीच उद्धव ठाकरे ने अपनी कमर कस ली है और यह इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है ताकि कमर टूटने से पहले इसे सीवा जा सके। संजय जाधव की अनुपस्थिति के बाद ठाकरे गुट ने परभणी की जिला इकाई में संगठनात्मक बदलाव भी किए हैं, जिसे एक तरह की चेतावनी माना जा रहा है।

2024 के चुनावी नतीजे और शिंदे का ‘दबाव’

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को भी याद रखना जरूरी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जहां एक ओर पूरे देश में भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार नहीं रहा, वहीं महाराष्ट्र में तो यह और भी चौंकाने वाला रहा।

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने 9 सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ दल होने के बावजूद एकनाथ शिंदे की शिवसेना मात्र 7 सीटों पर ही सिमटकर रह गई। यह नतीजा शिंदे गुट के लिए शर्मनाक था, क्योंकि उनके पास सरकारी मशीनरी और बीजेपी का साथ था। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी’ (MVA) ने कमाल कर दिया। एनडीए (NDA) को 48 में से मात्र 17 सीटें मिलीं, जबकि विपक्ष ने 30 से ज्यादा सीटों पर कब्जा कर लिया।

शिंदे गुट इस बात को लेकर काफी बैकफुट पर था कि जनता ने उन्हें ‘गद्दार’ की तरह देखा है। शायद यही वजह है कि अब शिंदे गुट उद्धव गुट के सांसदों को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अगर शिंदे को उद्धव के कुछ सांसद मिल जाते हैं, तो यह उनके लिए 2024 की हार की क्षति पूरी करने जैसा होगा।

महाराष्ट्र की 48 सीटों का गणित

आइए एक नजर डालते हैं महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों के बंटवारे पर, जो सियासी तस्वीर को साफ बयां करता है:

महाविकास अघाड़ी (विपक्षी गठबंधन):

  • कांग्रेस: 13 सीटें
  • उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी): 9 सीटें
  • शरद पवार गुट (NCP-SP): 8 सीटें
  • निर्दलीय (बागी कांग्रेसी): 1 सीट

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA – सत्तापक्ष):

  • भाजपा: 9 सीटें
  • एकनाथ शिंदे गुट (शिवसेना): 7 सीटें
  • अजित पवार गुट (NCP): 1 सीट

यह आंकड़ा दिखाता है कि विपक्ष एकजुट है और जनता का आशीर्वाद उनके साथ है। लेकिन, अगर शिंदे गुट उद्धव की 9 में से 2-4 सांसदों को भी तोड़कर ले आता है, तो विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र का यह आंकड़ा पलट सकता है।

14 जून: एक अहम दिन

अब सभी की निगाहें 14 जून को मातोश्री में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। क्या उद्धव ठाकरे अपने बागी सांसदों को मना पाएंगे? क्या वे कोई बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं? या फिर शिंदे गुट के दावों के बाद यह बैठक सिर्फ ‘संकट मोचन’ के लिए है?

एक बात तो साफ है कि महाराष्ट्र की सियासत में ‘सत्ता’ और ‘संघर्ष’ का यह दौर अभी थमा नहीं है। उद्धव ठाकरे ने जिस तरह से इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है, उससे संकेत मिलता है कि वे स्थिति की गंभीरता को समझते हैं। अब देखना यह है कि क्या वे ‘मातोश्री’ का किला फिर से मजबूत कर पाते हैं या शिंदे की ‘धोखे’ की राजनीति एक बार फिर कामयाब होती है। महाराष्ट्र की जनता और राजनीतिक जगत दोनों के लिए आने वाले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now