Delhi Municipal Corporation Elections: वर्ष 2027 में होने वाले दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। इस संदर्भ में भाजपा ने अपनी राजनीतिक बिसात बिछाना शुरू कर दी है। संगठनात्मक विस्तार, अपनी स्थिति मजबूत करने और आगामी चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भाजपा ने कई कदम उठाए हैं। एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, पार्टी ने हाल ही में आप पार्टी से अलग होकर बनी इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) का अपने साथ विलय कर लिया है, जो इस चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
भाजपा की निगम में रणनीति
दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही पार्टी की निगम में स्थिति मजबूत होती जा रही है। 11 भाजपा विधायकों के निगम मनोनीत सदस्य बनने और आप पार्टी पार्षदों के टूटने का फायदा भाजपा को पहले ही मिल चुका था। इससे निगम में भाजपा का बहुमत पहले ही स्थापित हो चुका था। भाजपा के पार्षदों की संख्या 104 से बढ़कर 123 हो गई थी, जिसका कारण भी पार्टी में शामिल हुए कई पार्षदों का भाजपा में विलय था।
हालांकि, इस संख्या में अब और इजाफा हुआ है। शुक्रवार को 16 IVP के पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से यह संख्या 123 से बढ़कर 139 हो गई है। यह कदम पार्टी के आगामी चुनावी समीकरणों को मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भाजपा का बहुमत और स्थिरता दोनों सुनिश्चित हो जाती है।
2022 के निगम चुनाव और वर्तमान परिदृश्य
2022 के दिसंबर में हुए निगम चुनाव में, कुल 250 सीटों में से आप पार्टी ने 134, भाजपा ने 104, कांग्रेस ने 9 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 3 सीटें जीती थीं। बाद में, निर्दलीय पार्षद भाजपा में शामिल हो गए, जिससे भाजपा की संख्या और भी बढ़ गई। उस समय, आप के पास 134 सीटें थीं, जो सत्ता बनाकर रखने के लिए पर्याप्त थीं। लेकिन राजनीति का यह खेल इतनी आसानी से नहीं चलता।
वहीं, विधानसभा चुनावों के दौरान, आप के पांच पार्षद भाजपा में शामिल हुए, और विधानसभा चुनाव के बाद, आप के चार से अधिक पार्षद भी भाजपा में चले गए। इन घटनाओं ने निगम में आप की स्थिति को कमजोर कर दिया, और भाजपा ने अपने समीकरण मजबूत कर लिए हैं। अब, भाजपा का उद्देश्य है कि आगामी चुनाव में अपनी स्थिति को और भी मजबूत बनाकर पुनः सत्ता हासिल की जाए।
भाजपा संगठन का मजबूत नेतृत्व
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का व्यक्तित्व इस रणनीति में अहम भूमिका निभा रहा है। मल्होत्रा स्वयं भी निगम पार्षद और मेयर रह चुके हैं, इसलिए वे निगम की राजनीति, स्थानीय मुद्दों और समीकरणों को भलीभांति समझते हैं। उनके नेतृत्व में, भाजपा ने इस साल के शुरुआत में ही आईवीपी का पार्टी में विलय कर लिया, जिससे आगामी चुनाव में पार्टी को लाभ होने की उम्मीद है।
मल्होत्रा की पहली प्राथमिकता निगम चुनाव जीतना है, क्योंकि यह न केवल पार्टी की सत्ता वापसी का संकेत होगा बल्कि यह दिल्ली में भाजपा की नई सरकार की स्वीकार्यता का भी प्रमाण बनेगा। पार्टी का मानना है कि यदि वे निगम चुनाव में सफल नहीं होते हैं, तो दिल्ली की जनता का समर्थन खत्म हो सकता है, जो भाजपा के लिए बड़ा झटका हो सकता है।
पार्षदों को पद और टिकट का वितरण
पार्षदों को इनाम देने की यह राजनीतिक प्रक्रिया भी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। IVP से भाजपा में शामिल पार्षदों को अहम पद देकर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि वे वफादार हैं और आगामी चुनाव में भी भाजपा का समर्थन करेंगे।
उदाहरण के तौर पर, आईवीपी की पार्षद ऊषा शर्मा को सिटी सदर पहाड़गंज जोन का अध्यक्ष पद का टिकट दिया गया है। वहीं, सुमन अनिल राणा को रोहिणी जोन में अध्यक्ष पद का प्रत्याशी घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त, हेमचंद गोयल को स्थाई समिति सदस्य का टिकट मिला है, जबकि दिनेश भारद्वाज को नरेला जोन में डिप्टी जोन चेयरमैन का पद मिला है।
वहीं, दूसरी ओर, आप से आए कुछ पार्षदों को भी पार्टी ने महत्वपूर्ण पद दिए हैं। उदाहरण के लिए, धर्मवीर को दक्षिण जोन का चेयरमैन, सुनील कुमार चड्ढा को पश्चिमी जोन का डिप्टी चेयरमैन, और प्रवीण कुमार को मध्य जोन का डिप्टी चेयरमैन बनाया गया है। यह पद वितरण 15 जुलाई को होने वाले जोन कमेटी के चुनाव से पहले तय किया गया है।























