संध्या समय न्यूज
गाजियाबाद आर्य समाज कवि नगर में शनिवार को दो दिवसीय वासन्तीय नवसस्येष्टि यज्ञ एवं होली मिलन समारोह का भव्य शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आचार्य चन्द्र पाल शास्त्री ने कहा कि होली एक प्राकृतिक पर्व है, ऐतिहासिक नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका वास्तविक अर्थ वसंत ऋतु में आई नई फसल को अग्नि में होमकर ग्रहण करना है।
यज्ञ एवं भजन से हुआ शुभारम्भ
वैदिक विद्वान प्रमोद शास्त्री के ब्रह्मत्व में वासन्तीय नवसस्येष्टि यज्ञ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस अवसर पर मुख्य यज्ञमान श्रीमती मृदुल अग्रवाल एवं विनोद प्रकाश अग्रवाल रहे। वैदिक विद्वान ने यज्ञ एवं होली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि होली मनाने का सही विधान वसन्त ऋतु के नए अन्न को यज्ञ में आहुति देकर ग्रहण करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति दान देकर, बाँट कर खाने में विश्वास करती है।” इस दौरान जिला सभा के प्रधान स्व. तेजपाल की आत्मिक शांति हेतु भी आहुतियां डाली गईं। इससे पहले, सहारनपुर से पधारे सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक अभिषेक आर्य एवं रविन्द्र आर्य ने होली मिलन के गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
‘होला’ से बनी ‘होली’: जानें वैदिक तथ्य
मुख्य वक्ता आचार्य चन्द्र पाल शास्त्री का पीतवस्त्र ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में संस्कृत शिक्षा के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए होली के वास्तविक स्वरूप को समझाया। उन्होंने कहा कि तिनकों की अग्नि में भूने हुए अधपके फली युक्त फसल को ‘होलक’ या ‘होला’ कहते हैं। रवि की फसल में आने वाले सभी प्रकार के अन्न को होला कहा जाता है। उन्होंने बताया कि वासन्तीय नवसस्येष्टि होलकोत्सव ही होली है, जो बाद में ‘होला’ से ‘होली’ बन गया। उन्होंने उपस्थित लोगों से वेदों का स्वाध्याय कर और जीवन को तदानुकूल बनाकर होली पर्व पर बेस्ट बनने का संकल्प लिया।
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जीवन को सफल बनाने के उपाय
पतंजलि योग पीठ हरिद्वार से पधारे स्वामी विवेक देव ने कहा कि दर्शन शास्त्रानुसार दिनचर्या बनाने से ही जीवन खुशहाल बनेगा। उन्होंने एकता और संगठन का संदेश दिया। वहीं, योगी प्रवीण आर्य ने कहा कि यज्ञ, योग और उपासना ईश्वर की प्राप्ति में सहायक साधन हैं। ये जीवन के अत्यावश्यक कर्तव्य हैं और इनसे ही मनुष्य का जीवन सार्थक होता है।
उपस्थित गणमान्य एवं संचालन
इस अवसर पर सर्वश्री राजेन्द्र आर्य, आलोक राघव, आशा रानी आर्या, डॉ. प्रमोद सक्सेना, त्रिलोक शास्त्री, दीपक आर्य एवं उप-प्रधान गजराज चौधरी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंच का कुशल संचालन यशस्वी प्रधान वी.के. धामा ने किया, जबकि समाज के संरक्षक बृजपाल गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में शांतिपाठ एवं ऋषि लंगर के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
















