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बुलडोजर का खेल, भाजपा सरकार का बुलडोजर, संजय सिंह का खुलासा

Delhi News: विपक्ष के इस आरोप के विपरीत, आप पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह का मानना है कि बुलडोजर कार्रवाई का लक्ष्य केवल मुसलमानों को ही निशाना बनाना नहीं है। उनके अनुसार, कुल कार्रवाई का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हिंदू परिवारों पर हो रहा है, जबकि मुसलमानों का हिस्सा केवल 10 प्रतिशत है।

संजय सिंह का दावा: 90% हिंदू परिवार भी प्रभावित हैं

HIGHLIGHTS

  • क्या यह मुसलमानों को टारगेट कर रहा है?
  • अवैध निर्माण या सांप्रदायिक रणनीति?
  • हिंदुओं का भी घर तोड़ा जा रहा है
  • किस समुदाय के घर सबसे ज्यादा टूट रहे हैं?
  • दिल्ली से वाराणसी, बुलडोजर का व्यापक प्रभाव

Sanjay Singhs revelation – News: वर्तमान भारतीय राजनीति में अक्सर यह चर्चा का विषय रहा है कि भाजपा शासित राज्यों में बुलडोजर कार्रवाई का प्रयोग किस तरह से किया जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इन कार्रवाइयों का मकसद मुसलमानों को टारगेट करना है, जबकि भाजपा समर्थक इसे विकास और अवैध निर्माण पर कार्रवाई का हिस्सा मानते हैं। इस विवाद के बीच वरिष्ठ भाजपा नेताओं और सरकार समर्थकों का तर्क है कि बुलडोजर का इस्तेमाल अपराधियों के अवैध निर्माण तोड़ने के लिए किया जा रहा है, न कि किसी खास समुदाय को लक्षित करने के लिए।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्यों में ‘बुलडोजर एक्शन’ आज एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि भगवा पार्टी की सरकारें अपराधियों के नाम पर खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही हैं। अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर अक्सर सांप्रदायिक रंग चढ़ने का आरोप लगता है। लेकिन, भाजपा के कट्टर विरोधी और आप पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस पूरे बहस में एक ऐसा आंकड़ा पेश किया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। संजय सिंह का दावा है कि बुलडोजर की पीड़ा सबसे ज्यादा हिंदुओं को झेलनी पड़ रही है, न कि मुसलमानों को।

संजय सिंह का अलग नजरिया

विपक्ष के इस आरोप के विपरीत, आप पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह का मानना है कि बुलडोजर कार्रवाई का लक्ष्य केवल मुसलमानों को ही निशाना बनाना नहीं है। उनके अनुसार, कुल कार्रवाई का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हिंदू परिवारों पर हो रहा है, जबकि मुसलमानों का हिस्सा केवल 10 प्रतिशत है। संजय सिंह का दावा है कि भाजपा सरकारें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के घर तोड़ रही हैं, लेकिन मीडिया और राजनीतिक दल अधिकतर मुसलमानों के घरों की ही चर्चा कर रहे हैं।

संजय सिंह ने एक पॉडकास्ट में कहा कि यदि आप देश के विभिन्न इलाकों में जाकर देखें तो पाएंगे कि हिंदुओं के भी हजारों घर तोड़े गए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वाराणसी, अयोध्या जैसे धार्मिक नगरों में भी बुलडोजर कार्रवाई हुई है। उनका तर्क है कि इन कार्रवाइयों का मकसद केवल अवैध निर्माण को रोकना है, न कि किसी खास समुदाय को टारगेट करना।

हिंदू समुदाय पर कार्रवाई का उदाहरण

संजय सिंह का तर्क है कि भारत के धार्मिक नगरों जैसे काशी और अयोध्या में भी भारी संख्या में हिंदू परिवारों के घर तोड़ दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि काशी जाइए, वहां बुलडोजर का प्रकोप देखने को मिलेगा। हजारों हिंदुओं के घर तोड़े गए हैं। अयोध्या में भी यही स्थिति है।” उनका दावा है कि इन कार्रवाइयों का मकसद विकास और अवैध निर्माण रोकना है, लेकिन राजनीतिक खेमे इसे सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं।

संजय सिंह ने यह भी कहा कि यदि आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो पाएंगे कि अधिकतर तोड़फोड़ हिंदू परिवारों की है। उन्होंने कहा कि मेरा दावा है कि पूरे देश में यदि आंकड़ों को देखा जाए तो 90 प्रतिशत घर हिंदू परिवारों के होंगे और 10 प्रतिशत मुसलमानों के।

दिल्ली का उदाहरण 12 लाख मकानों का विध्वंस

संजय सिंह ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में भी सरकार बड़ी संख्या में मकान तोड़ रही है। उन्होंने कहा कि मद्रासी कैंप, शालीमार बाग जैसे इलाकों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के घर तोड़े गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीन को उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट घरानों को सौंपने के लिए यह कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 12 लाख मकान तोड़ने की योजना है। यमुना के किनारे, करावल नगर से बदरपुर तक के इलाकों को साफ किया जा रहा है। सरकार स्कूल, अस्पताल भी तोड़ने जा रही है। संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य शहरी विकास और भूमि का पुनः आवंटन है, लेकिन इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हो रही है।

आरोप-प्रत्यारोप का माहौल

यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या बुलडोजर कार्रवाई का मकसद सिर्फ अवैध निर्माण को रोकना है या फिर यह राजनीतिक और सांप्रदायिक एजेंडों का हिस्सा है। विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकार का यह कदम मुसलमानों को डराने और उनके अधिकारों को सीमित करने के लिए है। वहीं, भाजपा समर्थक और सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में हो रही है और किसी समुदाय को विशेष रूप से निशाना नहीं बनाया जा रहा है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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