मालदा में जजों को बंधक बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकारा

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर रखने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस घटना को ‘न्यायिक प्रक्रिया में बाधा’ बताते हुए कहा कि इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस गंभीर मामले की जांच CBI या NIA जैसी किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपने की अनुमति दे दी है।

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के नजदीक आने के बीच राज्य में SIR (विशेष हस्तक्षेप रिपोर्ट) को लेकर विवाद गहरा गया है। मालदा जिले के एक गांव में SIR हटाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी भड़क गई कि प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया। रिपोर्ट के अनुसार, शाम 5 बजे शुरू हुए इस घेराव में जजों को करीब 8 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और उन्हें वहां से जाने नहीं दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने उठाया। उन्होंने अदालत को ‘द टेलीग्राफ’ अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए घटना की जानकारी दी। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “मैं इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता, लेकिन हमें सुबह 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी। शाम 5 बजे अधिकारियों का घेराव किया गया और रात 11 बजे तक वहां कोई नहीं था।” सिब्बल ने इस घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया।

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वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को सूचित किया कि इस घटना के बाद ज्यादातर न्यायिक अधिकारियों का तबादला राज्य से बाहर कर दिया गया है।

‘ऐसा ध्रुवीकृत राज्य पहले कभी नहीं देखा’

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बढ़ते ध्रुवीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। CJI सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल से सीधे तौर पर कहा, “दुर्भाग्य से आपके राज्य में आप सभी राजनीतिक भाषा बोलते हैं। यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है। हमने ऐसा ध्रुवीकृत राज्य पहले कभी नहीं देखा।”

सुरक्षा और जांच के आदेश

घटना की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों (Central Forces) को तैनात किया जाए। साथ ही, मालदा घटना की जांच राज्य पुलिस के बजाय CBI या NIA जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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