संध्या समय न्यूज
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका ने अपने यूरोपीय सहयोगियों को एक बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने साफ शब्दों में कह दिया है कि रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट केवल और केवल भारत को मिली है। यूरोपीय देशों को यह छूट नहीं दी जाएगी। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील भी दी जाती है, तो वह ज्यादातर भारत को होने वाली सप्लाई तक ही सीमित रहेगी।
भारत को क्यों मिली छूट?
इस मामले से परिचित सूत्रों ने ब्लूमबर्ग को दी जानकारी में बताया कि ईरान में चल रहे युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की किल्लत हो गई है। हाल ही में ईरान ने तेल व्यापार के लिए अहम समुद्री रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को बंद कर दिया है। इस कदम से सऊदी अरब और इराक जैसे देशों का कच्चा तेल भारत तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस संकट को देखते हुए तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिनों की विशेष छूट जारी की है। पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी, लेकिन मध्य पूर्व के बढ़ते संकट ने अमेरिका को यह रियायत देने पर मजबूर कर दिया है।
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ट्रंप का बयान और पुतिन से बातचीत
सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि वे तेल की कीमतें कम करने के लिए ‘कुछ तेल से जुड़े प्रतिबंधों’ को हटाने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि उसी दिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि, अब साफ हो गया है कि कोई भी रियायत भारत के पक्ष में होगी, यूरोप के नहीं।
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G-7 में अमेरिका का दृढ़ रुख
सोमवार को G-7 के वित्त मंत्रियों की बैठक में अमेरिका ने अपना रुख साफ कर दिया। अमेरिका ने जोर देकर कहा कि भारत को दी गई यह छूट समय और दायरे, दोनों के लिहाज से सीमित है। यूरोपीय आयोग के अर्थव्यवस्था आयुक्त वाल्दिस डोम्ब्रोवस्किस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यूरोपीय देशों को उम्मीद नहीं है कि इस छूट से रूस को तेल से होने वाली कमाई में कोई बड़ा असर पड़ेगा।” सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में प्रतिबंधों में कोई और ढील दी जाए, तो वह भी इसी तरह सीमित और विशेष परिस्थितियों में होगी। अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप ही करेंगे, लेकिन यूरोप के लिए राहत की संभावना कम है।




















