उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रॉपर्टी डीलिंग में हो रहे फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
बदले नियम, बढ़ी सुरक्षा
अब तक प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के लिए केवल आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड का ही सहारा लिया जाता था, लेकिन नए फैसले के तहत अब कोई भी संपत्ति बेचने से पहले विक्रेता का नाम खतौनी (खसरा-खतौनी) में होना अनिवार्य होगा। स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग अब रजिस्ट्री करने से पहले विक्रेता की पहचान और प्रॉपर्टी की मालिकाना हक की गहराई से जांच करेगा।
ऐसे रुकेगा फर्जीवाड़ा
नई व्यवस्था के तहत, यदि विक्रेता का नाम खतौनी में नहीं मिलता है या दस्तावेजों में अंतर है, तो रजिस्ट्रेशन विभाग तुरंत जांच शुरू करेगा। बिना मिल्कियत की जांच किए अब कोई भी अधिकारी रजिस्ट्री नहीं कर सकेगा। सरकार का मकसद इसके जरिए खरीद-फरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़े पर प्रभावी लगाम लगाना है, ताकि आम नागरिकों को ठगी का शिकार न होना पड़े।
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बैठक के अन्य अहम फैसले
प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के अलावा, कैबिनेट बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए गांवों तक पहुंचेगी बसें ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना’ के तहत प्रदेश के 59,163 गांवों में बस सेवा शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य उन 12 हजार से अधिक गांवों को जोड़ना है जहां अभी तक बसें नहीं जा पा रही थीं। इस योजना में निजी बस संचालकों को भी जोड़ा जाएगा और छोटी बसें (मिनी बसें) ही संचालित की जाएंगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस सेवा पर कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा।
स्टाम्प शुल्क में बदलाव के सर्किल रेट पर एक फीसदी शुल्क और विकास शुल्क के दो फीसदी अतिरिक्त स्टांप शुल्क के प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। अब यह राशि यूसी (Utilization Certificate) जारी होने के बाद निकायों को छमाही आधार पर दी जाएगी। नगर निगम सीमा में 2 फीसदी विकास शुल्क अलग से लिया जाएगा।















