RBI MPC Meeting Decisions:उन सभी लोन धारकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है, जिनका कर्जा रेपो रेट से लिंक है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद बुधवार को ऐलान किया कि प्रमुख ब्याज दर यानी ‘रेपो रेट’ को 5.25% पर यथावत रखा जाएगा। इस फैसले का सीधा मतलब है कि अब आपके होम लोन, कार लोन या अन्य लोन की मासिक किस्त (EMI) बढ़ने वाली नहीं है।
सर्वसम्मति से लिया गया ‘तटस्थ’ फैसला
बुधवार सुबह 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 6 से 8 अप्रैल तक चली नए वित्त वर्ष की पहली MPC बैठक में समिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने और ‘तटस्थ रुख’ अपनाने का निर्णय लिया। दिलचस्प बात यह है कि वैश्विक और घरेलू स्थितियों के आकलन के बीच ब्लूमबर्ग द्वारा ट्रैक किए गए सभी 33 अर्थशास्त्रियों ने भी यही अनुमान लगाया था कि आरबीआई दरें नहीं बदलेगी।
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गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले ने ब्याज दरों के रुझान को भी साफ किया। बता दें कि फरवरी 2024 से लेकर अब तक RBI ने कुल 125 बेसिस पॉइंट (आधार अंकों) की कटौती की है, जिसमें आखिरी कटौती दिसंबर 2025 में दर्ज की गई थी।
महंगाई पर क्या बोले गवर्नर?
खुदरा महंगाई (हेडलाइन CPI) को लेकर गवर्नर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस मोर्चे पर अभी भी ‘अपसाइड रिस्क’ (बढ़त का खतरा) बना हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि “घरेलू महंगाई के मोर्चे पर राहत भरे आंकड़े हैं और महंगाई नियंत्रण में है। सिर्फ खाद्य पदार्थों के दाम थोड़े बढ़े हैं।”
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान लगाया गया है। तिमाही आधार पर इसके Q1 में 4%, Q2 में 4.4%, Q3 में 4.2% और Q4 में 4.7% रहने की संभावना है।
GDP ग्रोथ अनुमान में आई कमी
वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को संशोधित किया है। पहले जहां विकास दर 7.6% रहने का अनुमान था, उसे अब घटाकर 7.3% कर दिया गया है।
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MPC मीटिंग में पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई गई। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि इस युद्ध की तीव्रता और अवधि भारत की जीडीपी ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर को होने वाला नुकसान और कच्चे तेल की सप्लाई चेन में आ रही बाधा महंगाई को बढ़ावा दे सकती है, जिससे विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है।




















