International News: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े जंगी हालातों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमा) में फंसे विभिन्न देशों के जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) नामक एक बड़े अभियान की घोषणा की है।
मिडिल ईस्ट समयानुसार सोमवार सुबह से शुरू हो इस मिशन को ट्रम्प ने एक ‘मानवीय पहल’ बताया है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे देश हैं जो सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं हैं, लेकिन उनके जहाज इस अहम समुद्री मार्ग में फंस गए हैं और उन्होंने अमेरिका से मदद मांगी है।
क्यों जरूरी है यह अभियान?
ट्रम्प ने बताया कि फंसे हुए जहाजों और उन पर मौजूद लोगों को निर्दोष बताते हुए कहा कि कई जहाजों पर खाने-पीने और जरूरी सामान की कमी हो गई है, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों (क्रू) की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालना अत्यंत जरूरी है।
इस योजना के तहत अमेरिकी नौसेना अपने युद्धपोतों की मदद से इन फंसे जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिखाएगी, ताकि वे बिना किसी खतरे के अपने गंतव्य को पहुंच सकें। ट्रम्प ने साफ कहा कि जब तक यह इलाका पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक कोई भी जहाज वापस नहीं आएगा।
वैश्विक व्यापार पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील और अहम समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ईरान से जुड़े तनाव के कारण यहां रुकावट पैदा होने से ग्लोबल ट्रेड और तेल की कीमतों पर भारी असर पड़ रहा है। ट्रम्प का मानना है कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ से सभी देशों को फायदा होगा और ईरान को भी इसका लाभ मिलेगा।
ईरान को चेतावनी और बातचीत का सुर
हालांकि, ट्रम्प ने इस मिशन को लेकर एक कड़ी चेतावनी भी दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी भी ताकत ने इस ऑपरेशन में रुकावट डालने की कोशिश की, तो अमेरिका इसका कड़ी से कड़ी जवाब देगा। यह बयान साफ इशारा है कि अमेरिका इस मिशन को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस बीच, ट्रम्प ने सकारात्मकता भी दिखाई। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अच्छी चल रही है और आने वाले समय में कोई बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि, इससे पहले ट्रम्प ने ईरान के 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया था।
अब देखना दिलचस्प होगा कि ईरान अमेरिका के इस ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और चेतावनी पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या यह अभियान बिना किसी बड़े संघर्ष के अपने लक्ष्य तक पहुंच पाता है।


























