Mumbai News : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आयोजित विशाल जनसभा में क्रिकेट और महाराष्ट्र के खोए हुए गौरव को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने खेल जगत में ‘मराठी प्रतिनिधित्व’ की कमी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आज भारतीय क्रिकेट टीम में एक भी मराठी खिलाड़ी नजर नहीं आता।
मुंबई क्रिकेट का स्वर्णिम अतीत और वर्तमान
शिवाजी पार्क के मैदान से राज ठाकरे ने मुंबई क्रिकेट के उस स्वर्णिम दौर को याद किया, जब भारतीय टीम की रीढ़ मुंबई के खिलाड़ी हुआ करते थे। उन्होंने कहा, “एक समय था जब टीम इंडिया के 11 खिलाड़ियों में से 8 से 9 खिलाड़ी अकेले मुंबई के होते थे। सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों ने न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है।”
‘मराठी’ प्रतिनिधित्व पर सवाल
राज ठाकरे ने सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा कि आज भारतीय क्रिकेट टीम में एक भी मराठी खिलाड़ी नहीं है।” हालांकि वर्तमान टीम में सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ी मुंबई में पले-बढ़े हैं, लेकिन ठाकरे का इशारा मुख्य रूप से ‘नस्लीय मराठी’ प्रतिनिधित्व की कमी की ओर था। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को तैयार करने की सोच और प्रक्रिया पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। ठाकरे ने कहा कि आज हम इस बात पर विचार भी नहीं कर रहे कि हम कहां पिछड़ रहे हैं। खिलाड़ियों को तैयार करने वाली वह सोच अब नहीं रही।

क्षेत्रीय गौरव बनाम मेरिट की बहस
राज ठाकरे के इस बयान ने खेल जगत में ‘क्षेत्रीय गौरव’ और ‘मेरिट-आधारित चयन’ के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का मानना है कि चयन केवल प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए, जबकि ठाकरे का तर्क है कि महाराष्ट्र के पास प्रतिभाओं का भंडार होने के बावजूद उन्हें अवसर नहीं मिल रहे या फिर उन्हें तैयार करने वाला बुनियादी ढांचा कमजोर हो गया है।
‘Maharashtra Next’ की शुरुआत
इस रैली में राज ठाकरे ने सिर्फ आलोचना ही नहीं की, बल्कि राज्य के विकास के लिए एक ठोस पहल भी की। उन्होंने ‘Maharashtra Next’ नामक एक वेबसाइट (पोर्टल) लॉन्च किया। इस अभियान के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र के विकास के लिए हमें आपके विचारों की जरूरत है। कृपया इस वेबसाइट पर अपना विजन और सुझाव साझा करें। हमारे विशेषज्ञ इनकी समीक्षा करेंगे और ठोस और व्यावहारिक सुझावों को सीधे सरकार के सामने रखा जाएगा।”




















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