Noida News: उत्तर प्रदेश के नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों की लंबित मांगों को लेकर हालात एक बार फिर गरमा गए हैं। ग्राम विकास संगठन नोएडा के बैनर तले किसान अपने अधिकारों की लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामले में, संगठन के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर से मुलाकात कर बैठक का कार्यवृत्त प्राप्त किया है। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने प्राधिकरण के रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि ‘कागज बोलता है’, लेकिन प्राधिकरण किसानों को उनका हक देने से बार-बार मुंह मोड़ रहा है।
Noida News: पिछली बैठक का हवाला
ग्राम विकास संगठन नोएडा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने बताया कि इससे पहले दिनांक 29 मई 2026 को एक अहम बैठक संपन्न हुई थी। इस बैठक में संगठन के पदाधिकारियों ने नोएडा प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों के साथ किसानों की मुख्य समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की थी। इस बैठक में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल, विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर, अरविंद कुमार, महाप्रबंधक नियोजन, महाप्रबंधक अशोक कुमार अरोड़ा और महाप्रबंधक एसपी सिंह जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
29 मई की इस उच्चस्तरीय बैठक में किसानों की ओर से तीन प्रमुख प्रतिवेदन रखे गए थे, जिन पर गहन मंथन हुआ था:
- अर्जित भूमि का हक: किसानों की सबसे पुरानी और प्रमुख मांग है कि अर्जित भूमि के सापेक्ष ‘करार नियमावली 1997’ का पूरी तरह से पालन किया जाए। संगठन की मांग है कि जिन किसानों की जमीन अर्जित हुई है, उन्हें नियमानुसार 10 प्रतिशत आबादी भूखंड प्रदान किया जाए। यह उनका संवैधानिक और नैतिक अधिकार है, जिसे लंबे समय से दबाया जा रहा है।
- आबादी जहां है, जैसी है: भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा 48 के तहत किसानों की मांग है कि जहां वर्तमान में आबादी मौजूद है, उसे उसी स्थिति में डिनोटिफाइड (अधिसूचना से मुक्त) किया जाए। किसानों का कहना है कि जहां उनके पूर्वज कई पीढ़ियों से रह रहे हैं, वहां से उन्हें उजाड़ा नहीं जा सकता और न ही उस आबादी को अधिग्रहित करने का कोई नैतिक आधार है।
- मॉडल ग्राम का विकास: नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले गांवों का ढांचा बदल चुका है। किसानों की मांग है कि शहरीकरण की इस भागीदारी के बदले इन गांवों को ‘मॉडल ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यहां रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
आज हुई मुलाकात में नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने संयोजक डीपी चौहान को बैठक का कार्यवृत्त सौंपा। उन्होंने बताया कि इस मिनट्स को उच्च स्तर पर अनुमोदन के बाद जारी किया गया है। प्राधिकरण ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 24 जून 2026 को फिर से बैठक बुलाई है। ग्राम विकास संगठन के संयोजक डीपी चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नोएडा प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले 81 गांव के किसानों को अब इस बैठक से बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन जल्द ही किसानों के पक्ष में कोई ठोस निर्णय लेगा और दशकों से चली आ रही समस्याओं का समाधान निकलेगा।
Noida News: कागज बोलता है, प्राधिकरण पर धोखाधड़ी का आरोप
हालांकि, संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान का रुख बेहद आक्रामक और सख्त दिखा। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण पर सीधे तौर पर छल कपट करने का आरोप लगाया। अशोक चौहान ने गुस्से से कहा, “किसानों का कागज बोलता है।” उनके मुताबिक, नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों के साथ साफ धोखा किया है और उनके अधिकारों पर डाका डाला है।
अशोक चौहान ने आगे कहा, “किसानों के पक्ष में सभी कागज और दस्तावेज मौजूद हैं। नियम और कानून हमारे साथ हैं, फिर भी प्राधिकरण जानबूझकर उन्हें उनका हक और अधिकार नहीं दे रहा है। यह सीधे-सीधे किसानों के विश्वास के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने कहा कि जब कानून और कागज सब कुछ साफ हैं, तो फिर आनाकानी क्यों की जा रही है? इसी वजह से आए दिन नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसान आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं।
Noida News: आंदोलन जारी रहेगा
अशोक चौहान ने स्पष्ट किया कि जब तक किसानों को उनका 10 प्रतिशत आबादी भूखंड नहीं मिलता और डिनोटिफिकेशन की मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर 24 जून की बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला, तो किसान उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
इस मौके पर ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान सहित कई किसान नेता उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में कहा कि ‘कागज बोलता है’ और अब इस कागज की आवाज को दबाया नहीं जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के लिए अब यह परीक्षा का समय है कि वह अपना वादा निभाता है या फिर किसानों के गुस्से का सामना करता है।























