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यूपी में धर्मांतरण रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई के नए निर्देश

UP News: उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण का मामला पिछले कुछ महीनों में सुर्खियों में रहा है। खासतौर पर मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण से जुड़े घटनाक्रम ने सरकार और प्रशासन को सतर्क कर दिया है। लखनऊ के KGMU और SGPGIMS में हाल ही में हुए कथित धर्मांतरण के मामलों ने प्रदेश भर में चिंता की लहर दौड़ा दी है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा कदम: मेडिकल कॉलेजों में जागरूकता अभियान

HIGHLIGHTS

  • सभी मेडिकल संस्थानों में धर्मांतरण विरोधी सेल का गठन
  • सरकार ने उठाए कड़े कदम, जागरूकता अभियान शुरू
  • छात्रों—कर्मचारियों के बीच जागरूकता फैलाने का आदेश जारी
  • प्रदेश में धर्मांतरण संबंधित मामलों पर सतर्कता बढ़ाई गई
  • सभी मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण विरोधी सेल का गठन

UP News: उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण की घटनाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, प्रदेश सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में धर्मांतरण को रोकने के लिए विशेष सेल गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। यह कदम खासतौर पर लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) में हाल ही में सामने आए धर्मांतरण के मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

धर्मांतरण का मामला और उसकी गंभीरता

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण का मामला पिछले कुछ महीनों में सुर्खियों में रहा है। खासतौर पर मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण से जुड़े घटनाक्रम ने सरकार और प्रशासन को सतर्क कर दिया है। लखनऊ के KGMU और SGPGIMS में हाल ही में हुए कथित धर्मांतरण के मामलों ने प्रदेश भर में चिंता की लहर दौड़ा दी है। इनमें से एक मामला युवती को लव जिहाद के जाल में फंसाने और धर्मांतरण का दबाव बनाने से जुड़ा था। इस संदर्भ में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज को गिरफ्तार किया गया था, जिसने शादी का झांसा देकर युवती को फंसाया और उसके धर्म परिवर्तन का प्रयास किया।

राज्यपाल का फैसला: खास सेल का गठन

इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने तत्काल प्रभाव से एक अहम निर्देश जारी किया। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अमित देवगन को निर्देशित किया कि प्रदेश के सभी मेडिकल, डेंटल और संबंधित संस्थानों में धर्मांतरण रोकथाम के लिए विशेष ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ गठित किया जाए। इस सेल का मुख्य उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण की गतिविधियों पर नजर रखना, जागरूकता अभियान चलाना, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्राप्त करना और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सेल के कार्य और जिम्मेदारियां

निर्देशानुसार, इन सेल का गठन तुरंत किया जाएगा और वे छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों, कर्मचारियों और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने का काम करेंगे। यह सेल शैक्षणिक परिसर में एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कार्य करेगा। इसके अलावा, यदि किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलती है, तो संबंधित नियमों एवं विधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की जाएगी। सेल का उद्देश्य न केवल धर्मांतरण की संभावना को रोकना है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में हो रहे किसी भी तरह के धार्मिक या जातीय भेदभाव को भी नियंत्रित करना है।

आदेश का पालन: तेजी से हो रहा क्रियान्वयन

अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने सभी सम्बंधित मेडिकल और डेंटल कॉलेजों को इस आदेश की त्वरित जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, इन संस्थानों में निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि सभी कॉलेजों को जल्द से जल्द अपने-अपने ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ बनाने और इसकी जानकारी विश्वविद्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

धर्मांतरण रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान

इन सेल का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं कर्मचारियों के बीच धर्मांतरण के विरुद्ध जागरूकता फैलाना है। इसके तहत, धर्मांतरण के प्रयास करने वालों की पहचान करना और आवश्यक कार्रवाई करना शामिल है। इसके साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों में धर्म एवं जाति से जुड़ी जानकारियों का सही और पारदर्शी तरीके से प्रसार किया जाएगा। इन कदमों का मकसद शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना है, ताकि किसी भी तरह का धार्मिक ध्रुवीकरण या जिहाद का प्रयास रोका जा सके।

संबंधित मामलों में कार्रवाई और सतर्कता

बता दें कि यूपी में धर्मांतरण का यह मामला पहली बार नहीं है। इससे पहले भी लखनऊ के KGMU में युवती को लव जिहाद के जाल में फंसाने और धर्मांतरण का प्रयास करने का मामला प्रकाश में आया था। इस घटना में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज को गिरफ्तार किया गया था, जिसने शादी का झांसा देकर युवती को फंसाया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। इस घटना के प्रकाश में आने के बाद, प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है और धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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