Bihar News: देशभर में चल रहे NEET री-एग्जाम (NEET Re-Exam 2026) के दौरान बिहार के लखीसराय से एक बड़ी नकल रैकेट का खुलासा हुआ है। इस बार सॉल्वर गैंग ने पारंपरिक तरीकों को त्याग दिया और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए परीक्षा प्रक्रिया की जड़ में सेंध लगाने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें 5 मेडिकल छात्र और एक बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी शामिल हैं। यह गिरफ्तारी इसलिए भी चौंकाने वाली है, क्योंकि इसमें देश के नामी मेडिकल संस्थानों के छात्र शामिल पाए गए हैं।
कौन है मुख्य सरगना?
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क को गया स्थित अन्नपूर्णा नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (ANMMCH) के छात्र अर्पित राज चला रहा था। अर्पित राज कोई साधारण छात्र नहीं है, बल्कि वह NEET 2026 पेपर लीक मामले में भी सीबीआई के रडार पर पहले से था और उससे पूछताछ भी हो चुकी है। री-एग्जाम में भी उसका हाथ होने से यह बात साफ हो गई है कि किस तरह से ये गिरोह एक-एक परीक्षा को निशाना बना रहे हैं। इस गैंग ने असली अभ्यर्थियों की जगह प्रॉक्सी (सॉल्वर्स) बिठाकर परीक्षा दिलाने की पूरी साजिश रची थी, जिसे पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।
बायोमेट्रिक कंपनी की आड़ में घुसपैठ
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बायोमेट्रिक कंपनी की संलिप्तता है। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और पहचान के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगाया गया था, लेकिन सॉल्वर्स ने इसी सिस्टम को हैक करने की कोशिश की। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) का थर्ड ईयर एमबीबीएस छात्र मयंक कश्यप, बायोमेट्रिक कंपनी के स्टाफ के रूप में फर्जी आईडी लगाकर हसनपुर हाई स्कूल परीक्षा केंद्र के अंदर घुस गया था।
पुलिस को जब इसकी भनक लगी, तो उसने मयंक को पहले दबोच लिया। मयंक से शुरूआती पूछताछ के बाद पुलिस को पूरे रैकेट के तार जुड़ने लगे। पुलिस ने मयंक की निशानदेही पर KRK हायर सेकेंडरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय लखीसराय में एक साथ छापेमारी की, जहां से 7 अभ्यर्थियों समेत कई लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों के छात्र बने सॉल्वर
जांच में जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे चौंकाने वाली हैं। सॉल्वर गैंग में कोई साधारण युवक नहीं, बल्कि देश के प्रतिष्ठित मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के पढ़े-लिखे छात्र शामिल थे। पुलिस ने बीएचयू (BHU) से नर्सिंग की छात्रा पूनम कुमारी को दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

इसके अलावा एम्स (AIIMS) रायबरेली के छात्र सौरभ झा, दिल्ली के शाहदरा स्थित एक मेडिकल कॉलेज के इंटर्न अमन अग्रवाल, और एनएमसीएच (NMCH) नर्सिंग कॉलेज के छात्र संजीत और उसके भाई को भी गिरफ्तार किया गया। ये सभी लाख-लाख रुपये के वादे पर असली अभ्यर्थियों की जगह पेपर दे रहे थे।
कैसे तरीके से निकले थे मेडिकल छात्र?
NEET री-एग्जाम के दौरान बिहार प्रशासन के सख्त निर्देश थे कि सभी मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा के दिन कैंपस से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। इसके लिए PMCH समेत अन्य कॉलेजों में छात्रों को व्यस्त रखने के लिए सेमिनार और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था।
लेकिन इन इंतजामों को ताक पर रखते हुए PMCH के कई छात्र इन कार्यक्रमों से गायब हो गए। पुलिस जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी मयंक कश्यप ने बीमारी का बहाना बनाकर कॉलेज से बाहर निकलने का रास्ता निकाला और सीधा लखीसराय पहुंचकर बायोमेट्रिक स्टाफ बनकर घुस गया।






















