Flamingo: प्रकृति हमेशा से इंसानों को अपनी अद्भुत रचनाओं से हैरान करती आई है। अक्सर हम इंसानों द्वारा बनाई गई इमारतों और आधुनिक इंजीनियरिंग की तारीफ करते हैं, लेकिन पक्षियों की दुनिया में एक ऐसा ‘प्रोफेशनल ठेकेदार’ मौजूद है, जिसकी कला देखकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाए। बात हो रही है गुलाबी रंग के सुंदर पक्षी ‘फ्लेमिंगो’ (Flamingo) की, जो सिर्फ अपनी खूबसूरती ही नहीं, बल्कि पानी में कीचड़ से टावर जैसा घोंसला बनाने की अनोखी तकनीक के लिए दुनियाभर में मशहूर है।
वैसे तो हर पक्षी अपने ढंग से घोंसला बनाता है, लेकिन फ्लेमिंगो का तरीका कुछ अलग ही है। सोशल मीडिया पर इनके घोंसलों की तस्वीरें और वीडियोज इन दिनों तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे देखकर लोग यकीन ही नहीं कर पा रहे हैं कि कोई पक्षी इतना जटिल काम कर सकता है।
पानी में बनता है ‘मिनी टावर’
फ्लेमिंगो झीलों, लैगून और उथले पानी वाले इलाकों का घर है। घोंसला बनाने के लिए ये पक्षी अपनी चोंच और पैरों का इस्तेमाल एक ‘मैकेनिकल टूल’ की तरह करते हैं। पानी में मौजूद कीचड़, मिट्टी और छोटे-छोटे पत्थरों को इकट्ठा कर ये एक टीले (Mound) का रूप देते हैं। ये टीला 30 से 50 सेंटीमीटर (लगभग 1.5 फीट) ऊंचा होता है, जिसे दूर से देखने पर एक अनोखा टावर लगता है।
अंडों को बचाने का है ‘स्पेशल फॉर्मूला’
आपके मन में सवाल होगा कि आखिर पक्षी इतनी मेहनत क्यों करता है? तो इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण है।
- पानी से सुरक्षा: उथले पानी में अचानक बाढ़ या पानी के स्तर में वृद्धि हो सकती है। ऊंचा टावर बनाने से अंडा पानी में डूबने से बच जाता है।
- शिकारियों से बचाव: ऊंचाई पर बना घोंसला सांपों और अन्य शिकारी जानवरों की पहुंच से दूर रहता है।
- तापमान नियंत्रण: ऊंचाई और कीचड़ के ढेर से अंडे का तापमान ठीक रहता है।
हजारों की संख्या में बनता है ‘किला’
फ्लेमिंगो बहुत सामाजिक (Social) पक्षी होते हैं। ये अकेले नहीं, बल्कि हजारों की कॉलोनी में रहते हैं। जब ये घोंसला बनाते हैं, तो एक साथ मिलकर इतने सारे टावर बनाते हैं कि पूरा इलाका किसी ‘विशाल किले’ जैसा नजर आता है। मादा फ्लेमिंगो इस टावर के ऊपर एक ही अंडा देती है, जिसे नर और मादा दोनों मिलकर बारी-बारी से सेते हैं।
कीचड़ का घोंसला है पत्थर से भी मजबूत
फ्लेमिंगो के घोंसले की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है। पानी में बनने के बावजूद, जब इस कीचड़ का टावर सूखता है, तो यह पत्थर जैसा कड़ा और टिकाऊ हो जाता है। कई बार फ्लेमिंगो अपने बनाए इस ‘महल’ पर बैठे हुए दिखते हैं, जो दर्शकों के लिए एक अद्भुत नजारा होता है।
फ्लेमिंगो से जुड़े कुछ और रोचक फैक्ट्स
*गुलाबी रंग का राज: फ्लेमिंगो का जन्म सफेद या हल्के भूरे रंग में होता है। इनका गुलाबी रंग इनके खाने पर निर्भर करता है। झीलों में मिलने वाले शैवाल और छोटे जीवों में ‘बीटा-कैरोटीन’ नामक पिगमेंट होता है, जो इन्हें गुलाबी बनाता है।
- एक पैर पर खड़े रहना: ये दुनिया के ऐसे दुर्लभ पक्षी हैं, जो एक पैर पर खड़े होकर आराम करते हैं।
- परिवार की जिम्मेदारी: घोंसला बनाने से लेकर अंडे सेने तक का हर काम नर और मादा दोनों मिलकर करते हैं।
- प्रजातियां: दुनिया में फ्लेमिंगो की कुल 6 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें ‘ग्रेटर फ्लेमिंगो’ (Greater Flamingo) सबसे आम है।
प्रकृति के इस ‘सुपर इंजीनियर’ की कहानी बताती है कि जीव-जंतुओं के अंदर भी इंसानों से कम इंटेलिजेंस और समझदारी नहीं है। बिना किसी आधुनिक टूल के फ्लेमिंगो द्वारा बनाया गया यह ‘मिट्टी का टावर’ आज भी विज्ञानियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक रिसर्च का विषय बना हुआ है।



















