Women’s Empowerment and Adoration Act: सांसद बांसुरी स्वराज ने इस ऐतिहासिक बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को श्रेय दिया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की इच्छा शक्ति के कारण ही 27 साल से लटका हुआ महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में सितंबर 2023 में संसद से पारित हो सका।” उन्होंने बताया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को इस आरक्षण का लाभ मिले, इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है।
आंकड़ों ने दिखाई महिलाओं की भागीदारी की कमी
बांसुरी स्वराज ने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े साझा करते हुए एक अहम बिंदु पर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव में महिलाओं का वोटिंग परसेंटेज (65.8%) पुरुषों (65.6%) से ज्यादा रहा। लेकिन, इस बावजूद सदन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 13.6% है। उन्होंने कहा कि इस बिल के लागू होने से 2029 से लेकर राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा, जिससे समाज में उन्हें नेतृत्व का मौका मिलेगा और निर्णय लेने में उनकी भूमिका प्रमुख होगी।
MP Smt. @kjsehrawat & MP Ms. @BansuriSwaraj are addressing a Press Conference. #NariShaktiVandan https://t.co/GrskHy2qzs
— BJP Delhi (@BJP4Delhi) April 12, 2026
मिस्ड कॉल देकर जताएं समर्थन
इस अधिनियम के लिए जनसमर्थन जुटाने के लिए बांसुरी स्वराज ने एक फोन नंबर 9667173333 जारी किया। उन्होंने आम जनता से इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर अपना समर्थन जताने की अपील की। स्वराज ने विशेष रूप से पुरुषों से भी अपील करते हुए कहा, “मैं सभी अपने भाइयों से भी कहना चाहती हूं कि वे इस विधेयक के लिए अपना समर्थन जताने के लिए इस नंबर पर मिस कॉल दें।”
‘वूमेन लीड डेवलपमेंट’ का उदाहरण
इस अवसर पर सांसद कमलजीत सेहरावत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि यह बिल सिर्फ महिला सशक्तिकरण और विकास की बात नहीं है, बल्कि यह ‘वूमेन लीड डेवलपमेंट’ (महिला-नेतृत्व वाले विकास) का जीता-जागता उदाहरण है।”
सेहरावत ने सभी विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा और कहा कि ऐसा नहीं है कि पहले राजनीतिक दलों की महिलाओं को आगे बढ़ाने की इच्छा नहीं थी। पहले भी यह बिल कई बार संसद में आया, लेकिन तरह-तरह के बहानों के चलते यह पास नहीं हो सका। लेकिन, मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही इस रास्ते की सभी रुकावटें दूर कर दी हैं। दोनों सांसदों ने आशा जताई कि सभी दल इस विधेयक को लागू करने के लिए संसद में सर्वसम्मति से समर्थन देंगे, ताकि देश की नारी शक्ति को सच्ची तरह से सम्मान और सशक्तिकरण मिल सके।



















