मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा संसद प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान जब कांग्रेस नेताओं ने अपने प्रदर्शन को तेज किया, तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। बताया गया है कि प्रियंका गांधी वाड्रा को मंदिर मार्ग थाने में रखा गया है, जिसे विपक्षी नेताओं का समर्थन करने वाले समर्थक और कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं का विरोध प्रदर्शन और हिरासत

HIGHLIGHTS

  • सोनिया गांधी पहुंचीं थाने, प्रियंका गांधी से मिलीं तुरंत
  • छात्रों पर अत्याचार: विपक्ष का पीएम आवास के बाहर जोरदार हंगामा
  • पुलिस ने हिरासत में लिया राहुल-प्रियंका, कांग्रेस ने किया विरोध
  • कांग्रेस नेताओं का धरना जारी, सरकार पर गंभीर आरोप लगाए
  • राहुल गांधी का दावा, सरकार छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रही

Congress’s protest in Parliament: मौजूदा संसद सत्र के दूसरे दिन, राजनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी और असंतोष व्यक्त करने के लिए दिल्ली के प्रधानमंत्री आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसदों ने भाग लिया, जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे जैसे प्रमुख नेताओं के साथ ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल थे। इन नेताओं का आरोप था कि केंद्र सरकार युवा छात्रों पर हो रहे क्रूर अत्याचार और शिक्षा व्यवस्था के प्रति अनदेखी कर रही है।

कांग्रेस का विरोध और पुलिस हिरासत

प्रदर्शन के दौरान जब कांग्रेस नेताओं ने अपने प्रदर्शन को तेज किया, तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। बताया गया है कि प्रियंका गांधी वाड्रा को मंदिर मार्ग थाने में रखा गया है, जिसे विपक्षी नेताओं का समर्थन करने वाले समर्थक और कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं। साथ ही, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है और उन्हें बस में बिठाकर अपने साथ ले गई है। यह कार्रवाई विपक्षी दलों के बीच सरकार के प्रति नाराजगी को और बढ़ा रही है।

सोनिया गांधी का सक्रिय कदम

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पार्टी की संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय दिखीं। वे मंदिर मार्ग थाने पहुंचीं हैं और प्रियंका गांधी से मिलकर उन्हें समर्थन दिया। सोनिया गांधी का यह कदम पार्टी के प्रति उनके मजबूत समर्थन और विपक्षी नेताओं के साथ एकजुटता का संकेत है। सोनिया गांधी का यह कदम विपक्षी दलों के बीच सरकार के खिलाफ एकजुटता को और भी मजबूत कर रहा है।

प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन और बैठकें

धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, लेकिन इससे पहले वे अपने विरोध प्रदर्शन को तेज कर रहे थे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, और अखिलेश यादव को पुलिस ने बस में बिठाकर अपने साथ ले गई। इस बीच, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ हम प्रधानमंत्री मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार इस घटना की जिम्मेदारी लेने से भाग रही है और संसद में इस मुद्दे पर बहस नहीं चाहती।

सरकार का रवैया और बातचीत की कोशिशें

धरने के दौरान, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से दोबारा मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने सरकार का पक्ष रखा और बताया कि विपक्ष का पेपर लीक के मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, राहुल गांधी इस बात पर अड़े रहे कि उनके मुख्य मुद्दे में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देना है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि राहुल गांधी के साथ बातचीत के बाद, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह गृहमंत्री अमित शाह से मिले। दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट तक चर्चा चली, जिसमें प्रदर्शन और सरकार की नीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।

विपक्ष का आरोप और जनता का समर्थन

राहुल गांधी ने मीडिया के सामने कहा कि देश का युवा अपने भविष्य को लेकर निराश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवा छात्रों पर अत्याचार कर रही है और उनके भविष्य को बर्बाद कर रही है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब सरकार का मंत्री कहता है कि उसकी कुर्सी सुरक्षित है, तो यह देश के न्याय और लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जिम्मेदारी लेने से कतरा रही है और इस तरह के रवैये से जनता में असंतोष बढ़ रहा है।

छात्र आंदोलन और सरकार के खिलाफ आवाज़

यह प्रदर्शन छात्रों के प्रति सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ा संकेत है। छात्र संगठन और युवा वर्ग का मानना है कि वर्तमान सरकार उनकी आवाज़ को दबाना चाहती है, लेकिन विपक्षी नेताओं का यह आंदोलन इस बात का प्रतीक है कि वे सरकार की दमनकारी नीति के खिलाफ खड़े हैं। इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार को चेतावनी देना है कि यदि वह अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती, तो विपक्ष और जनता मिलकर सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखेंगे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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