Yamuna Revival Project: दिल्ली में यमुना की सफाई और नदी के पुनरुद्धार को लेकर आज गुरुवार को राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्याम विहार में यमुना पुनरुद्धार से संबंधित 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने आप पार्टी (AAP) और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दिल्ली में यमुना की बदहाल स्थिति के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया।
कार्यक्रम में अमित शाह ने दिल्ली की राजनीति के साथ-साथ पंजाब में नशे की समस्या, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और विपक्ष की चुनावी संभावनाओं पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अगले 30 वर्षों तक सत्ता में बनी रहेगी और विपक्ष को लंबे समय तक सरकार बनाने का मौका नहीं मिलेगा।
8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से यमुना को साफ करने का लक्ष्य
यमुना पुनरुद्धार परियोजना कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में लंबे समय तक आप पार्टी और कांग्रेस की सरकारें रहने के बावजूद नदी की सफाई के लिए अपेक्षित काम नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि अब यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में भाजपा सरकार ठोस कदम उठा रही है।
अमित शाह ने कहा कि यमुना की सफाई और पुनरुद्धार का काम भाजपा सरकार के कार्यकाल में आगे बढ़ेगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसने नदी की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।
दिल्ली में यमुना का प्रदूषण लंबे समय से एक बड़ा पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा रहा है। नदी की सफाई के लिए सीवेज प्रबंधन, गंदे पानी के शोधन और प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण जैसे कदम अहम माने जाते हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं की वास्तविक सफलता उनके क्रियान्वयन और प्रदूषण में होने वाली कमी से तय होगी।
अमित शाह का दावा- 30 साल तक नहीं बनेगी विपक्ष की सरकार
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को कई राज्यों में लंबे समय से राजनीतिक समर्थन मिलता रहा है और आने वाले वर्षों में भी पार्टी की सरकारें बनती रहेंगी।
अमित शाह ने गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और असम का उल्लेख करते हुए विपक्ष की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा अगले 30 वर्षों तक सरकार में बनी रहेगी और विपक्ष को सत्ता में आने की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। शाह ने कहा कि विपक्ष चुनाव परिणामों और संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर दोहरे मापदंड अपनाता है। उनके मुताबिक, जब चुनावी नतीजे विपक्ष के पक्ष में आते हैं, तब व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन नतीजे विपरीत होने पर आरोप लगाए जाते हैं।
हालांकि, अगले 30 वर्षों तक किसी एक पार्टी की सरकार रहने का उनका बयान एक राजनीतिक दावा है, न कि भविष्य के चुनाव परिणामों की निश्चित घोषणा।
SIR और वोट चोरी के आरोपों पर भी दिया जवाब
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर भी अमित शाह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष के वोट चोरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस आधार प्रस्तुत करना चाहिए।
मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता भारतीय लोकतंत्र के महत्वपूर्ण विषय हैं। इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं।
पंजाब में नशे के मुद्दे पर आप पार्टी को घेरा
अमित शाह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आप पार्टी की सरकार पर भी हमला बोला है और उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नशे का कारोबार रोकने में मौजूदा सरकार प्रभावी साबित नहीं हुई है। शाह ने दावा किया कि भाजपा और उसके सहयोगी दल पंजाब में नशे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक पंजाब से नशे की समस्या खत्म करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने पंजाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने की संभावना जताई। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। इस मुद्दे पर विभिन्न दल एक-दूसरे की नीतियों और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे हैं।
केजरीवाल के सवाल पर अमित शाह की प्रतिक्रिया
अमित शाह ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के बयान का भी जिक्र किया। केजरीवाल ने बिहार, गुजरात, राजस्थान और गोवा में नशे की समस्या को खत्म करने को लेकर गृह मंत्री से सवाल किए थे।
इस पर अमित शाह ने कहा कि उनके पास केजरीवाल के सवालों के जवाब हैं, लेकिन पंजाब में आप पार्टी की सरकार को सत्ता से हटाने के बाद वह जवाब देंगे। उनके इस बयान से साफ हुआ कि नशे का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब की राजनीति में भी अहम भूमिका निभा रहा है।


























