Mesh Sankranti 2026: संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और यह भगवान सूर्य को समर्पित होता है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस दिन को संक्रांति कहा जाता है। इस बार मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2026 को मनाई जा रही है, जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यह परिवर्तन सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर होगा। इसी दिन खरमास का समापन भी माना जाता है, जिससे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि
मेष संक्रांति के दिन प्रातःकाल जल्दी उठें और स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें रोली, लाल फूल और अक्षत (चावल) डालें। अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर सिर के ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे जल अर्पित करें और गिरती हुई जलधारा के बीच से सूर्य के दर्शन करें।
अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का जप करें:
- “ॐ सूर्याय नमः”
- “ॐ घृणि सूर्याय नमः”
अर्घ्य देने के बाद वहीं खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें और अंत में सूर्य देव को प्रणाम कर सुख-समृद्धि की कामना करें।
अर्घ्य देते समय रखें इन बातों का विशेष ध्यान
- अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर नहीं पड़ने चाहिए।
- जल गिराने के लिए नीचे कोई पात्र या गमला अवश्य रखें।
- अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का ही उपयोग करें।
- इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो, तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- अर्घ्य हमेशा सूर्य उदय के समय ही देना चाहिए।
क्यों है मेष संक्रांति का विशेष महत्व?
मेष संक्रांति से सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रभाव और अधिक शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता का संचार होता है।


















