सूर्य पूजा का खास दिन: मेष संक्रांति पर अर्घ्य देने की सही विधि जानें

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य देव की पूजा और अर्घ्य देने से आरोग्य, सम्मान, सफलता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। लेकिन यदि अर्घ्य सही विधि से न दिया जाए, तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।

एक खगोलीय घटना जो भारत के विविध सौर नववर्षों की नींव है
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HIGHLIGHTS

  • मेष संक्रांति 2026: सूर्य को अर्घ्य देते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
  • मेष संक्रांति पर ऐसे दें सूर्य को अर्घ्य, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल
  • मेष संक्रांति 2026: इस समय करें अर्घ्य, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
  • अर्घ्य देते वक्त रखें इन बातों का ध्यान, वरना व्यर्थ हो जाएगी पूजा
  • मेष संक्रांति पर सूर्य देव को प्रसन्न करने के आसान उपाय

Mesh Sankranti 2026: संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और यह भगवान सूर्य को समर्पित होता है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस दिन को संक्रांति कहा जाता है। इस बार मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2026 को मनाई जा रही है, जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यह परिवर्तन सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर होगा। इसी दिन खरमास का समापन भी माना जाता है, जिससे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।

सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि

मेष संक्रांति के दिन प्रातःकाल जल्दी उठें और स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें रोली, लाल फूल और अक्षत (चावल) डालें। अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और लोटे को दोनों हाथों से पकड़कर सिर के ऊपर उठाएं। धीरे-धीरे जल अर्पित करें और गिरती हुई जलधारा के बीच से सूर्य के दर्शन करें।

अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का जप करें:

  • “ॐ सूर्याय नमः”
  • “ॐ घृणि सूर्याय नमः”

अर्घ्य देने के बाद वहीं खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें और अंत में सूर्य देव को प्रणाम कर सुख-समृद्धि की कामना करें।

अर्घ्य देते समय रखें इन बातों का विशेष ध्यान

  • अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर नहीं पड़ने चाहिए।
  • जल गिराने के लिए नीचे कोई पात्र या गमला अवश्य रखें।
  • अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का ही उपयोग करें।
  • इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो, तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • अर्घ्य हमेशा सूर्य उदय के समय ही देना चाहिए।

क्यों है मेष संक्रांति का विशेष महत्व?

मेष संक्रांति से सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रभाव और अधिक शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता का संचार होता है।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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